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शीतलता लाए शर्बत

शीतलता लाए शर्बत

शर्बत मुख्य रूप से फल से बनता है जैसे बेल का शर्बत, फालसे का शर्बत आदि। बेल का शर्बत पेट के लिए अत्यंत लाभदायक है। इसी प्रकार फालसों को मसल कर उनका रस निकाल लिया जाता है।

यदि इसे चीनी के साथ उबाल लिया जाए और बोतल में रख लिया जाए तो सारी गर्मी काम आ सकता है। शर्बत गुलाब और शर्बत खास केसर का वर्णन तो वेदों में भी मिलता है। गुलाब के शर्बत में सबसे मशहूर हमदर्द का ‘रूह अफजा’ है। हल्दीराम के भी कई प्रकार के शर्बत बाजार में हैं जैसे कस का शर्बत, ठंडाई, गुलाब आदि। इसके अलावा दिल्ली की सबसे पुरानी और शायद सबसे मशहूर दुकान ‘घंटेवाला’ भी अपने यहां कई प्रकार के शर्बत तैयार करवाते हैं।

पुरानी दिल्ली के मुख्य बाजार बल्लीमारान की गली कासिमजान में ‘बकाई दवाखाना’ में भी शर्बत उपलब्ध हैं। हकीम मसूद अहमद बकाई का मानना है कि गर्मी की तपिश को दूर करने के लिए शर्बत से बढ़िया कोई और पेय नहीं है। गर्मी में यदि बुखार हो जाय तो पेट, आंतों व जिगर की गर्मी निकालने के लिए ‘बनफ्शा’, नोएडा की ‘देहल्वी रेमेडीज’ ने शर्बत तैयार किया है। भारी गर्मी में ‘शर्बत अंगूर शीरीं’ पीने से तुरंत तरावट का अहसास होता है। ऐसे ही कुछ अन्य शर्बत हैं - शर्बत कासनी, शर्बत उन्नाव, शर्बत नीलोफर, शर्बत केवड़ा, शर्बत फौलाद। शर्बत फौलाद आम शारीरिक कमजोरी को दूर करता है। शरबतों में विशेष शरबत होते थे खीलों का शरबत, इमली का पन्ना, कैरी का पन्ना, जौ का शरबत, फिरनियों का शरबत आदि। ऐसे ही आटे, गुड़ और कच्चे आम से ‘गुड़ंबा’ बना कर खाया जाता था, जो गर्मी के लिए दवा का काम करता था। गर्मी में फालूदे की रीति भी प्राचीन समय से है। जब दिल्ली में बर्फ बननी शुरू हुई तो देखिए कि बर्फ वाला अपनी बर्फ की प्रशंसा में किस प्रकार चार चांद लगाता था ‘बर्फ है या किसी माशूक के घर की सिल है, लग के सीने से ये करती है कलेजा ठंडा।’

बदल गए आसमां कैसे-कैसे! दिल्ली की भी यही कहानी है। शरबतों की जगह  कोल्ड ड्रिंक्स और मॉकटेल्स  ने ले ली है। कुल्फी-फालूदे का स्थान आइसक्रीमों ने ले लिया है। ठंडे तहखानों की जगह एअर कंडीशन ने ले ली है और मटकों के ठंडे पानी का स्थान फ्रिज की बोतलों ने ले लिया  है।   

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