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भारत बाल मजदूरों का गढ़ विशेषज्ञ

भारत बाल मजदूरों का गढ़ विशेषज्ञ

भारत बाल अधिकारों से जुड़ी लगभग सभी अंतरराष्ट्रीय संधियों का हस्ताक्षरकर्ता होने के बावजूद बाल मजदूरों का गढ़ बन चुका है।

बाल अधिकारों से जुड़ी संस्था चाइल्ड राईट्स एण्ड यू क्राई ने बाल श्रम निषेध दिवस पर अपनी एक रिपोर्ट में भारत में दुनियाभर के सर्वाधिक बाल मजदूरों का हवाला देते हुए सरकार से बाल श्रम निषेध एवं नियंत्रण कानून, 1986 को इस मामले में कठोर बनाने की अपील की है।

क्राई के महाप्रबंधक अतींद्रनाथ दास ने बताया कि इस कानून के दायरे में कुल बाल श्रमिकों मे फंसे फिलहाल 15 प्रतिशत ही आते हैं। उन्होंने बताया कि व्यापारिक खेती,गैर कानूनी कारखानों में लगे और अत्याधिक गरीबी से जूझ रहे मजदूरों के बच्चे इस कानून के दायरे में नहीं आते हैं।

संस्था के निदेशक दीपांकर मजूमदार ने बताया कि जनगणना में हर बार बाल मजदूरों की संख्या में बढोत्तरी हो जाती है। उन्होंने कहा कि देश में गरीबी की बढोतरी में बाल श्रमिकों की बढ़ती संख्या का अहम योगदान है और सरकार को बाल श्रम से निजात पाने के लिए बाल श्रम कानून में माकूल बदलाव करके इसकी कमजोरियों को दूर करना चाहिए।
 

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