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बार कोड

आपने अकसर फॉर्म, किताबों में नीचे की तरफ स्पेसिंग लाइन देखी होगी। इन लाइनों को बार कोड कहा जाता है। बार कोड को ऑप्टिकल मशीन द्वारा पढ़ा जाता है। क्षतिज और ऊध्र्वाधर बार, स्पेस किसी नंबर और सिंबल का कोड फॉर्म होते हैं। उन कोड को नंबर और सिंबल के रूप में बार कोड स्कैनर पढ़ता है।

बार कोड में मुख्यत: पांच पार्ट होते हैं। एक स्टार्ट जोन, स्टार्ट कैरेक्टर, डाटा कैरेक्टर, स्टॉप कैरेक्टर और क्वाइट जोन। बार कोड को पढ़ने के लिए बार कोड रीडर जिसे प्राइस स्कैनर भी कहते हैं, का इस्तेमाल किया जता है। यह स्टेशनरी डिवाइस होती है जो बार कोड की इनफॉरमेशन को स्टोर करती है।

रीडर में एक लेजर बीम लगी होती है जो लाइन और स्पेस में रिफलेक्शन के द्वारा कोड को डिजिटल डाटा में बदल देती है जिसे कंप्यूटर को ट्रांसफर कर दिया जता है। मुख्यत: पांच तरह के बार कोड रीडर होते हैं- पेन वांडस, स्लॉट स्कैनर, सीसीडी स्कैनर, लेजर स्कैनर और इमेज स्कैनर। पेन वांड सबसे आसान बार कोड रीडर होता है।

पहले बार कोड टाइप के प्रोडक्ट का पेटेंट 1952 में वुडलैंड और सिल्वर ने करवाया था। बार कोड की शुरुआत एक स्पेशल कैरेक्टर से होती है, जिसे स्टार्ट कोड कहा जता है। हर कोड एक स्पेशल कैरेक्टर के साथ होता है, जिसे स्टॉप कोड कहा जता है।

स्टार्ट कोड, बार कोड स्कैनर को बारकोड पढ़ते वक्त, शुरुआत के बारे में बताता है। वहीं स्टॉप कोड बार कोड स्कैनर को पढ़ते वक्त बताता है कि बार कोड अंत पर पहुंच गया है। लीनियर बार कोड के साथ वर्तमान में द्विविमीय, इलेक्ट्रॉनिक बार कोड का चलन बढ़ा है। बार कोड का इस्तेमाल सुपरमार्केट के अलावा पुस्तकालयों में किताबों को ट्रेक करने में भी होता है।

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