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वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी की हिदायत राज्य अनावश्यक ग खर्चे कम करें

वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी की हिदायत राज्य अनावश्यक ग खर्चे कम करें

आगामी आम बजट को लेकर वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी और राज्य आमने-सामने आ गये हैं। मुखर्जी ने राज्यों को हिदायत दी है कि वे गैर-जरूरी कामों में अनाप-शनाप खर्च से बाज आयें और सिर्फ उत्पादक कामों में सरकारी पैसे का इस्तेमाल करते हुये आर्थिक विकास दर में तेजी के लाने के काम में जुटें।

साथ ही राज्यों के मुख्य मंत्रियों और वित्त मंत्रियों के साथ बजट पूर्व बैठक के दौरान उन्होंने राज्यों को दी गई वित्तीय रियायतों की निगरानी करने का भी ऐलान कर दिया है। इसकी जिम्मेदारी कैबिनेट सचिव को सौंपी गई है।
दूसरी ओर राज्यों ने आर्थिक संकट के दौर में केंद्र सरकार को राजकोषीय दायित्व के लक्ष्यों को और लचीला बनाते हुये बाजर से और धन जुटाने की अतिरिक्त छूट दी जानी चाहिये।

राज्यों के मुताबिक राज्य सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) में राजकोषीय लक्ष्य को अभी दो फीसदी और भी कम किये जाने की जरूरत है। इसके साथ ही राज्यों ने छठे वेतन आयोग की सिफारिशों के कार्यान्वयन के सिलसिले में केंद्र सरकार से इसके कुल बोझ का आधा हिस्सा वहन करने का भी दबाव डाल दिया है।

गुड्स एवं सर्विस टैक्स (जीएसटी) पर कुछ राज्यों को छोड़कर अधिकांश राज्यों में समयबद्ध ढंग से इसे लागू करने की बात कही है। साथ ही राज्यों ने विभिन्न स्कीमों में ज्यादा फंड देने और कृषि, सिंचाईं,बैंककर्ज, लघु एवं मझोले उद्योगों को सहायता और सड़क निर्माण क्षेत्र में आ रही दिक्कतों को पेश करते हुये केंद्र से सहयोग मांगा है।

मुखर्जी ने उन्हें आश्वासन दिया है कि आगामी बजट में उनके सुझवों को ध्यान रखा जाएगा। बैठक में मुखर्जी ने कहा कि बीते और चालू वित्त वर्ष के लिए  राज्यों को राज्य सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) के 0.5 फीसदी तक की अतिरिक्त बाजार उधारी की अनुमति दी गई थी।

उन्होंने कहा कि फिलहाल अर्थव्यवस्था को ऊंची विकास दर में पहुंचाना प्राथमिकता है लेकिन मध्यवाधि में राजकोषीय हालत को दुरुस्त करना जरूरी होगा। आगामी बजट में सरकार की प्राथमिकता आम आदमी तक सरकारी योजनाओं को अधिक से अधिक लाभ सुनिश्चित करना होगा।

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  • Web Title:बजट पर केंद्र-राज्य आमने-सामने