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ऐसा क्यों कर रहा है श्रम मंत्रालय

केन्द्रीय श्रम मंत्रालय कारोबारी साल 2009-10 में भारी लाभ की संभावनाओं के मद्देनजर प्रोविडेन्ट फंड पर 8.5 प्रतिशत की दर से ब्याज देने की बात कह रहा है। कर्मचारी भविष्य निधि योजना 1995 के पेंशनधारियों की पेंशन में लगभग 8 साल बीत जने के बावजूद न्यूनतम बीमांकन में मात्र 4 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी नियमानुसार नहीं की ज रही है। समझ में नहीं आता श्रम मंत्रालय कर्मचारी भविष्य निधि पेंशन योजना 1995 के वार्षिक बीमांकन में नियमानुसार चार प्रतिशत की वृद्धि नहीं कर इस योजना के पेंशनधारियों के साथ अन्याय क्यों कर रही है?
युधिष्ठिर लाल कक्कड़, गुड़गांव

टूटा लालू का हसीन सपना

लालू जी ने खुद एवं अपनी पत्नी राबड़ी देवी के सत्ता सुख भोगने के लिए बिहार में 15 साल मुख्यमंत्री पद का लाभ उठाया। बिहार की सुरक्षा व्यवस्था के कारण वहां के लोगों ने उन्हें नकार कर नीतीश कुमार को सत्ता सौंप दी। इस दौरान काफी हद तक वहां पर विकास एवं शांति की स्थापना हुई। इसके बाद लालू प्रसाद का रुख केन्द्र की ओर हुआ। इनकी पार्टी राजद कांग्रेस की शरण में आ गई। लालू प्रसाद यादव मलाईदार मंत्रालय रेलमंत्री के पद पर विराजमान हुए। मगर इन्होंने स्वयं प्रधानमंत्री का सपना देखकर तीसरे मोर्चे का गठन किया। जनता ने समझ कि इन्होंने जिस थाली में खाई, उसी में छेद कर डाली। और इनकी पार्टी को भारी नुकसान उठाना पड़ा। लालू प्रसाद का हसीन सपना टूट गया।
राजेन्द्र सिंह रावत, इंदिरापुरम, गाजियाबाद

यूपी का जलवा महाराष्ट्र में

एक ताज आर्थिक सव्रे रिपोर्ट में बताया गया है कि महाराष्ट्र आने वालों में यूपी के लोगों की संख्या, सबसे ऊपर है। इसके अनुसार सिर्फ यूपी से ही 4.23 लाख लोग आए हैं। बिहार से 1.35, गुजरात से 1.19 तथा राजस्थान से 0.82 लाख लोग महाराष्ट्र आए हैं।  रिपोर्ट में यह भी तो दर्शाना चाहिए कि महाराष्ट्र से अन्य राज्यों में कितने लोग पहुंचे हैं? वसे भी यह रिपोर्ट महाराष्ट्र आने वालों की है। वहां पर बसने वालों की नहीं।
राजेन्द्र कुमार सिंह, रोहिणी, दिल्ली

 

सरकारी गलतियां

आज हम अंग्रेजी में भले ही वर्तनी या स्पेलिंग संबंधी गलतियां न करते हों लेकिन हमारे हिन्दी लेखन में अशुद्धियों की भरमार होती है। हिन्दी को संवारने के लिए विद्यालयों में अध्यापक जितना जोर लगाते हैं, बाहर वालों द्वारा उससे कहीं ज्यादा जोर हिन्दी की सेहत को बिगाड़ने के लिए लगाया ज रहा है। इसमें दिल्ली सरकार का योगदान भी किसी से कम नहीं। सरकारी दस्तावेजों और विज्ञापनों में अशुद्धियों की भरमार रहती है। 31 मार्च 2009 को विभिन्न समाचार पत्रों में प्रकाशित दिल्ली सरकार के शिक्षा विभाग के विज्ञापन संख्या डीआईपी/334/09-10 में ‘उज्ज्वल’ शब्द को ‘उज्वल’ लिखा है। 
सुरेश कुमार, रोहिणी, दिल्ली

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