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राष्ट्रीय बाल मजदूरी विरोधी दिवस पर विशेष

बच्चे इतने ज्यादा गायब हो रहे हैं कि यूपी का पुलिस महकमा राष्ट्रीय बाल अधिकार आयोग को इनकी सूची नहीं दे रहा है। वर्ष 2008 जनवरी से अप्रैल तक गौतमबुद्ध नगर समेत पूरे यूपी से 1058 बच्चे गायब हुए थे। इसके बाद की सूची बार-बार पुलिस मुख्यालय से मांगने के बाद भी राष्ट्रीय बाल अधिकार आयोग को पुलिस महकमा नहीं दे रहा है। यह हालत तब हैं जब नोएडा निठारी कांड के बाद भी लगातार बच्चों के गायब होने से परेशान है। ज्यादातर जनपदों की ऐसी ही कहानी है।


राष्ट्रीय बाल अधिकार आयोग की रिपोर्ट के अनुसार यूपी, बिहार और मणिपुर गायब बच्चों की संख्या आयोग को नहीं दे रहे हैं। आयोग के पास में यूपी में 2008 में सात बच्चों और 2009 में जनवरी से अब तक छह बच्चों के गायब होने की सूचना खुद अभिभावकों ने आकर दी है। हाल ही में नोएडा में आयोजित एक कार्यक्रम में सम्मिलत होने आईं राष्ट्रीय बाल अधिकार आयोग की सदस्य संध्या बजाज ने कहा कि बच्चों की तस्करी में लिप्त माफिया का टारगेट गरीब परिवार के बच्चे हैं। बच्चों को देश के विभिन्न हिस्सों से लेकर विदेश तक मजदूरी व देह व्यापार के लिए बेचा जा रहा है। बजाज ने कहा कि यूपी के पुलिस महानिदेशक विक्रम सिंह को गायब बच्चों की सही संख्या की जानकारी के लिए लिखा गया मगर अभी तक पूरी सूची आयोग को नहीं मिली है। सूची के लिए एक बार फिर से पुलिस महानिदेशक को रिमाइंडर भेजा जाएगा।


आयोग की सदस्य ने कहा कि मजदूरी से बचाए जाने वाले बच्चों के पुर्नस्थापित करने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। बच्चों को शिक्षा का अधिकार दिलाने, खेलने के लिए पार्को की समस्या को दूर करने के लिए आयोग प्रयासरत है। इस बार राष्ट्रीय बाल मजदूरी विरोधी दिवस बेटियों को समर्पित है। बेटियों को पढ़ाने व उनके अधिकार दिलाने के लिए समाज को विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से जागरूक किया जाएगा, इसकी शुरुआत शुक्रवार से की जा रही है।

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