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श्याम रजक ने कहा-सत्ता के मद में चूर थे नेता,संगठन को जमीन पर नहीं ले जा पाए

 ... और राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद ने राजद नेताओं और कार्यकर्ताओं की मंशा भांप ली। उन्होंने किसी को दिल की भड़ास निकालने का मौका ही नहीं दिया। पहले ही वक्ता के तेवर को देख कर उन्होंने साफ कर दिया कि सम्मेलन को छोटा किया जाए। कार्यकर्ताओं को सुनने वे खुद उनके पास जाएंगे।

बहाना गर्मी का था। लिहाज मंच पर बैठे कई बड़े नेता भी श्रोताओं की श्रेणी में ही रहे। बावजूद जिसको मौका मिला वे बाज नहीं आये। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव व राष्ट्रीय प्रवक्ता श्याम रजक ने तो साफ कह दिया कि पार्टी के नेता और कार्यकर्ता सत्ता के मद में चूर हो गये थे।

पार्टी के संगठन को जमीन पर ले जाने में हमने भूल कर दी। अकलियतों को भी अपेक्षित प्रतिनिधित्व नहीं मिला। राज्य और जिला स्तर पर तो संगठन खड़ा हो गया लेकिन प्रखंड, पंचायत और बूथस्तर पर हम कहीं नहीं रहे। प्रदेश अध्यक्ष अब्दुलबारी सिद्दीकी ने भी स्वीकार किया कि जमीनी स्तर पर हम संगठन को नहीं ले जा सके

हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इसके लिए नेताओं के प्रयास में कोई कमी रही। खुद लालू प्रसाद भी इस बात से सहमत थे। तभी तो उन्होंने कहा कि संगठन में युवाओं को तरजीह दी जाएगी। पैरबी पुत्रों की अब नहीं चलेगी। 

खास बात यह रही कि लालू प्रसाद अपने दिल की बात छुपा भी नहीं सके। अपने भाषण के अंत में उन्होंने कह ही दिया कि हम चाहते तो थे सबका सुनना लेकिन डर यह भी था कि गर्मी की वजह से आपकी जुबान से कोई ऐसी बात न निकल जए जिसे मीडिया वाले बेवजह तूल दें।

बहरहाल जो भी हो सम्मेलन में पूर्व केन्द्रीय मंत्री कांति सिंह, अखिलेश सिंह, नव निर्वाचित सांसद उमाशंकर सिंह के अलावा नागमणि और आलोक मेहता जैसे दजर्नों नेताओं को भाषण का मौका नहीं मिला।

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  • Web Title:नेताओं के तेवर देख लालू ने सम्मेलन को संक्षिप्त किया