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जब एक जासूस बना शीतयुद्ध का कारण

जब एक जासूस बना शीतयुद्ध का कारण

आखिरकार उस शीर्ष जासूस का नाम उजागर कर दिया गया है जिसने ब्रिटेन के परमाणु बम का रहस्य सोवियत संघ को सौंपा था और जिससे पश्चिम के साथ रूस की परमाणु तनातनी बनी और शीतयुद्ध का रूप अपना लिया।

एमआई 5 ने उसपर शक किया था, उसका पीछा किया था और उसके हर कदम, हर हरकत पर निगाह रखी थी, लेकिन वह कभी उसपर हाथ नहीं डाल सका। रूसी खुफिया एजेंसी केजीबी ने उसका कोड नाम एरिक रखा था। उसे मित्र राष्ट्रों के परमाणु बम के रहस्यों को चुराने की मुहिम सौंपी गई और इस मुहिम को इनारमस का नाम दिया गया।

एमआई 5 के सार्वजनिक किए गए दस्तावेजों में पुष्टि की गई है कि मास्टर स्पाई कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में कैवेंडिश लेबोरेटरीज में कार्यरत था जो युद्धकाल के परमाणु अनुसंधान कार्यक्रम का केन्द्र था। सत्तर साल के बाद एमआई 5 और केजीबी फाइलों के सार्वजनिक होने पर आखिर में पता चला कि एरिक एंजेलबर्ट (बर्टी)  ब्रौडा था जिसकी दास्तान हॉलीवुड की फिल्मों जैसी गुप्तचरी, जासूसी, मोहब्बत और बेवफाई से लबरेज है।
  

टाइम्स ऑनलाइन की एक रिपोर्ट के अनुसार ब्रौडा केजीबी का सबसे महत्वपूर्ण जासूस था। उसने रूस को एक दशक तक ब्रिटेन के परमाणु रहस्य सौंपे। इन रहस्यों में अमेरिका के मैनहटन प्रोजेक्ट में प्रयोग किए गए प्रारंभिक परमाणु संयंत्र का ब्ल्यूप्रिंट शामिल है। 

रिपोर्ट के अनुसार एरिक की सूचनाओं ने रूस को परमाणु बम बनाने की होड़ में शामिल होने का मौका दिया। इससे हालात ने वह मोड़ लिया जिसमें सोवियत संघ और पश्चिम के बीच आधी सदी तक परमाणु तनातनी चली। हालांकि उस दौर का केजीबी अभिलेखागार अब सील कर दिया गया है, लेकिन 1990 के काल के कुछ दस्तावेजों से पता चलता है कि ब्रोडा की केंद्रीय भूमिका थी।

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