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दो टूक

सच पूछिए तो नजफगढ़ के नवाब से ऐसी उम्मीद नहीं थी। अगर कंधे की चोट ने उनका दामन आईपीएल के वक्त ही थाम लिया था तो वे इसे छिपाते क्यों रहे? एक सीनियर खिलाड़ी को क्या यह शोभा देता है कि एक बड़े टूर्नामेंट के लिए रवाना होते समय वह इतनी अहम बात गोल कर जाए? आखिरकार नुकसान किसका हुआ? चोट प्रकरण से टीम और मीडिया में बेवजह टकराव पैदा हो गया। धोनी की पत्रकारों से बाकायदा झड़प हो गई। यही नहीं, टूर्नामेंट के ऐन बीच में टीम के एक धुरंधर खिलाड़ी की स्वदेश वापसी जैसी नेगेटिव खबर क्रिकेट प्रेमियों को सुननी पड़ी। क्रिकेट में इधर इतनी दौलत और शोहरत हो गई है कि सहवाग क्या, किसी भी खिलाड़ी का मन डोल जाए। सवाल लेकिन यह है कि बोर्ड ने क्यों आंखें मूंद रखी थीं? और खुद कैप्टन साहब अपने एक स्टार खिलाड़ी की चोट से अनजान कैसे रहे?

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