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एनसीआर में सर्व शिक्षा अभियान पर सवालिया निशान

शपथ के बाद सबसे पहले देश में शिक्षा की स्थिति बेहतर करने की बात कहने वाले प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह को एनसीआर में सर्व शिक्षा अभियान की रिपोर्ट पर गौर करना होगा। इसमें फरीदाबाद की स्थिति चौंकाने वाली मिलेगी। यहां एक अरब से ज्यादा खर्च करने के बावजूद शिक्षा विभाग सरकारी स्कूलों में बच्चों की तादात बढ़ाने में नाकाम रहा है। प्राइमरी स्कूलों में दाखिल छात्रों के पिछले चार वर्षो के आंकड़े इसकी तस्दीक करने के लिए काफी हैं। जिसने छात्रों की घटती संख्या से पर्दा उठाया है।


अभियान के छह साल पूरे होने के बाद भी बच्चों के स्कूल छोड़ने का सिलसिला बदस्तूर जारी है। ड्रापआउट बच्चों का दाखिला करवाने में भी शिक्षा विभाग को अपेक्षित कामयाबी नहीं मिल पाई। जबकि इसके लिए प्रत्येक वर्ष लाखों रुपये का बजट रखा जाता है। वर्ष 2005 में सरकारी प्राइमरी स्कूलों में 129655 छात्र थे। वर्ष 2008 में मात्र 114516 पर सिमट कर रह गई। ऐसे में सरकारी स्कूलों में घटती शिक्षा गुणवत्ता का लाभ प्राइवेट स्कूल संचालक जमकर उठा रहे हैं।


कार्यकारी डीईओ और जिला प्राथमिक शिक्षा अधिकारी काननबाला गोयल इस बात को स्वीकारती है कि सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या घटती जा रही हैं। लेकिन इसका कारण बताने में असमर्थ हैं। उनका कहना है कि विभाग के निर्देशानुसार दाखिले के समय स्कूल अध्यापक घर-घर जाकर बच्चों को स्कूल में दाखिले के लिए प्रोत्साहित करते हैं।


सरकारी स्कूलों  में छात्रों की संख्या को बढ़ाने के उद्देश्य से वर्ष 2002-03 में सर्व शिक्षा अभियान की शुरुआत की गई थी। अभियान शुरु होने के बाद एक साल के अंदर स्कूलों की संख्या में गजब का उछाल देखा गया। सर्व शिक्षा अभियान शुरु होते समय वर्ष 2003-04 में जिले के सरकारी प्राथमिक स्कूल में छात्रों की संख्या 109539 थी। वर्ष 2004-05 में छात्रों की संख्या बढ़कर 129655 पर पंहुच गई।


इसके बाद अधिकारियों की अनदेखी के चलते प्राइमरी स्कूलों में छात्रों की संख्या का ग्राफ निरंतर घटता गया। वर्ष 2006-07 में प्राइमरी स्कूलों में छात्रों की संख्या घटकर 116700 पहुंच गई। जबकि वर्ष 2008-09 में प्राथमिक स्कूलों में छात्रों का ग्राफ घटकर 114516 पर सिमट कर रह गया।


अभिभावक एकता मंच के प्रदेश महासचिव कैलाश शर्मा बताते हैं कि प्राइवेट स्कूलों में चल रही मनमानी का कारण सरकारी स्कूलों में शिक्षा का गिरता स्तर है। स्कूलों में सर्व शिक्षा अभियान के तहत छात्रों की संख्या बढ़ाने के लिए कोई पहल नहीं की जा रही है। इसके चलते अभिभावक अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में पढ़ा रहे हैं। ताकि बच्चों को बेहतर शिक्षा दे सकें।

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