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दिल्ली मेट्रो को रियायती दर पर जमीन

आखिर टकराव के बाद एमसीडी की स्थायी समिति ने बुधवार को  दिल्ली मेट्रो को रियायती दर पर जमीन देने के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी जिसके तहत लाजपतनगर मेट्रो स्टेशन पर प्रवेश व निकास ढांचों के निर्माण के लिए 542.14 वर्ग मीटर जमीन दी जाएगी। इसके साथ ही एक अन्य प्रस्ताव के तहत मेट्रो के एमआरटीएस के फेज-दो के लिए भूमि की 11 पॉकेटों के आवंटन को भी मंजूरी दे दी गई।


पिछली स्थायी समिति में लाजपतनगर मेट्रो स्टेशन के लिए जमीन देने से निगम ने यह करते हुए इंकार कर दिया था कि मेट्रो रियायती दर पर जमीन लेकर आगे कामर्शियल इस्तेमाल के लिए दे देता है और उसे बाजार दर पर जमीन दी जानी चाहिए। इस पर मेट्रो के अफसर निगम नेताओं व अफसरों से मिले। स्थायी समिति अध्यक्ष रामकिशन सिंघल ने कहा कि मेट्रो को यह जमीन स्टेशन की सीढ़ियां वगैरा बनाने के लिए चाहिए न कि कॉमर्शियल इस्तेमाल के लिए। मेट्रो को यह जमीन 1450 रूपये प्रति वर्गमीटर की दर से दी गई है। इसके अलावा दूसरे फेज के लिए जमीन की 11 पॉकेट में से छह पॉकेट स्थायी आधार पर और पॉच पॉकेट तीन साल के लिए अस्थायी आधार पर देने के प्रस्ताव को भी हरी झंडी दे दी गई।


मालूम हो कि मेट्रो को जमीन देने के मसले पर निगम का टकराव होता रहा है। भाजपा सदस्यों का यही तर्क रहा है कि मंत्रियों के समूह का फैसला निगम कानून की धारा 200 (सी) का उल्लंघन है। डीएमआरसी कोई विभाग नहीं है और वह एक एजेंसी है जिसका मकसद मुनाफा कमाना है। डीएमसी कानून के तहत किसी भी ऐसी एजेंसी को रियायती दर पर जमीन नहीं दी जा सकती है। मेट्रो न तो निगम को संपत्ति कर देता है और न ही उसकी जमीन पर होने वाले कारोबार के लिए कोई ट्रेड लाइसेंस लिया जाता है। भवन उपनियमों के तहत नक्शे भी पास नहीं कराए जाते  और न ही विज्ञापन से होने वाली कमाई में कोई कर या हिस्सा देता है।

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