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इस्पात मंत्रालय 13 हजार करोड़ खर्च करेगा

इस्पात मंत्रालय अपने सार्वजनिक क्षेत्र के तीन उपक्रमों-सेल, आरआईएनएल, और एनएमडीसी में विस्तार और आधुनिकीकरण की परियोजनाओं पर 13 हजार करोड़ रु. खर्च करेगा। इन आधुनिकीकरण और विस्तार योजनाओं को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा करावाने और उनकी प्रगति सुनिश्चित करने के लिए एक तंत्र गठित किया जाएगा। केंद्रीय इस्पात मंत्री वीरभद्र सिंह ने बुधवार को यहां इस्पात मंत्रालय के 100 दिन की कार्ययोजना पेश करते हुए कहा कि उनके मंत्रालय ने सरकारी और निजी क्षेत्रों में इस्पात उत्पादन में वृद्धि को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। इसके तहत 2011-12 तक सालाना 12 करोड़ 40 लाख टन इस्पात उत्पादन क्षमता हासिल करना है। अभी यह साढ़े पांच करोड़ टन वार्षिक है।


एक सवाल के जवाब में  सिंह ने कहा कि घरेलू बाजार में इस्पात की कीमतों में अनावश्यक वृद्धि पर सरकार चुप नहीं रहेगी। उन्होंने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में इस्पात की कीमतों को लेकर अभी घबराने जैसी कोई स्थिति नहीं है लेकिन घरेलू बाजार में दामों में बिना किसी वजह के वृद्धि की जाएगी तो सरकार हस्तक्षेप करने से पीछे नहीं हटेगी। इस मौके पर इस्पात राज्यमंत्री ए साई प्रताप और इस्पात सचिव वी के रस्तोगी भी मौजूद थे। गौरतलब है कि घरेलू इस्पात कंपनियां मांग में वृद्धि को देखते हुए दाम बढ़ाने पर विचार कर रही हैं। कुछ कंपनियों ने दामों में वृद्धि कर भी दी है।


चीन समेत कुछ अन्य देशों से इस्पात के सस्ते आयात से घरेलू उद्योग को प्रभावित होने से बचाने के लिए बचाव शुल्क लगाने के बारे में पूछे गए सवालों के जवाब में सिंह ने कहा कि अभी ऐसी कोई स्थिति पैदा नहीं हुई है। सेल और एनएमडीसी में विनिवेश के संबंध में पूछे जाने पर  सिंह ने कहा कि यह नीतिगत मामला है। विनिवेश कितना और कब किया जाएगा इसका फैसला मंत्रिमंडल की बैठक में लिया जाएगा। राष्ट्रपति के अभिभाषण में 100 दिन की कार्यसूची में सार्वजनिक उपक्रमों में सरकार की हिस्सेदारी कम करना भी शामिल है।


 लौह अयस्क के निर्यात के सवाल पर इस्पात मंत्री ने कहा कि उनका मानना है कि इसकी देश में ही खपत पर जोर दिया जाना चाहिए। कार्यसूची में छत्तीसगढ़ के बस्तर इलाके में एनएमडीसी के प्रस्तावित इस्पात संयंत्र का काम इस साल के अंत तक शुरू कर देना, अपेक्षाकृत छोटे सरकारी क्षेत्र के उपक्रमों की पुनर्संरचना, पन्ना-हीरा खान को पुन: चालू करना,स्पंज आयरन इंडिया लिमिटेड का एनएमडीसी में विलय, भारत रिफ्रैक्ट्रीज लि. का सेल में विलय, महाराष्ट्र इलैक्ट्रोस्मेल्ट लिमिटेड का सेल में विलय और आईआरएनएल को नवरत्न उपक्रम का दर्जा देना शामिल है। इसके अलावा मंत्रालय की 20 सूत्रीय कार्ययोजना में सेल को चिरिया माइंस का आवंटन, एनएमडीसी संसागदा लौह अयस्क खान का आवंटन, छत्तीसगढ में रावघाट माइंस के लिए वन संबंधी मंजूरी, हिन्दुस्तान स्टील वक्र्स कंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड का पुनर्गठन, बर्ड ग्रुप की कंपनियों का पुनर्गठन, स्टील मैल्टिंग शाप सेल के भिलाई स्टील संयंत्र का कार्य शुरू किया जाना, सेल का शिपिंग कापरेरेशन आफ इंडिया के साथ संयुक्त उद्यम आदि भी रखे गए हैं।

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