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हमारी धरती, हमारे संकल्प और अखबार

हमारी धरती, हमारे संकल्प और अखबार

विश्व पर्यावरण दिवस- पृथ्वी पर कम, समाचार पत्रों में ज्यादा दिखाई दिया। पर्यावरण दिवस के 21 संकल्प कल्पना में अधिक, हकीकत में कम दिखाई दिए। मैं भी कुछ अपने संकल्प पेश कर रहा हूं। गर्मी के दो-तीन महिनों में पूरे परिवार को एक ही कमरे में, एक ही एयरकंडीशनर में सुलाने की अर्ज करें। घर के सामने पानी कम छिड़काव करें। गीजर, ओवन, टोस्टर के सारे उपयोग गैस चूल्हें से प्रयोग करें। रूमाल, अंडरवियर, बनियान स्वयं ही अपने हाथों से धोने चाहिए। बाजर के, दुकानों के सभी कार्य पैदल ही करने चाहिए।

राजेन्द्र कुमार सिंह, रोहिणी, दिल्ली

कब रुकेंगे नस्ली हमले

ऑस्ट्रेलिया में भारतीय छात्रों पर नस्ली हमले रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं। हमारी सरकार इस विषय में ऑस्ट्रेलिया सरकार से दृढ़ता से कहने में संकोच कर रही है। ऑस्ट्रेलिया सरकार ने अपने आप को हमलों की निन्दा करने और खेद प्रकट करने तक सीमित कर लिया है।  मुबारकबाद के हकदार हैं महानायक अमिताभ बच्चन जिन्होंने भारतीय छात्रों की पीड़ा को समझते हुए ऑस्ट्रेलिया की डॉक्टरेट की मानद उपाधि ठुकरा दी है।

आसिफ खान, बाबरपुर, दिल्ली

बैंक तबादलों पर ध्यान दें

वैश्विक बाजरों से मिले सकारात्मक संकेत तथा विदेशी संस्थागत कारणों से शेयर बाजर तथा सेंसेक्स की बढ़त हो रही है। यह देशहित में शुभ लक्षण है, परंतु कुछ बैंकों ने अपने कर्मचारियों से दो-दो बार आप्शन लिया ताकि उन्हें ट्रेनिंग के बाद पदस्थापित किया जा सके। पर दो-दो बार आप्शन देने पर पदस्थापन नहीं किया। इससे कर्मचारियों में क्षोभ है। क्या कार्यकुशलता बढ़ाने के लिए बैंक क्या कर्मचारियों को इच्छानुसार पदस्थापन देगें?

रामकृपाल सिंह, अश्विनी नगर, मेरठ

सरकारी स्कूलों का सच

दिल्ली के सरकारी स्कूलों के रिजल्ट के बारे में लगातार प्रशंसा के जो कसीदे पढ़े जा रहे हैं, इससे मैं सहमत नहीं हूं। गणित तथा विज्ञान विषय को अंग्रेजी माध्यम से पढ़ानेवाले प्रतिभा विकास विद्यालयों और सर्वोदय विद्यालयों की संख्या सीमित है तथा इनमें प्रवेश पाना भी पब्लिक स्कूलों में प्रवेश पाना जैसा है। अंग्रेजी माध्यम से गणित और विज्ञान पढ़ाने वाले सर्वोदय तथा प्रतिभा विकास विद्यालयों का रिजल्ट बेहतर रहता है। आज भी 10वीं के बाद 11वीं कक्षा में डिमांडेबल विज्ञान तथा कामर्स विषयों में प्रवेश हेतु भटकना होता है।

भरत, तुगलकाबाद, नई दिल्ली

केंद्र की कुर्सी

प्रदेश की मुख्यमंत्री की कुर्सी मिलने के बाद क्षेत्रीय दल कुछ दिन बाद ही दिल्ली की केन्द्रीय कुर्सी प्राप्त करने का ख्वाब देखने लगते हैं। इस दौरान राज्य का ख्याल छोड़कर के दिल्ली की कुर्सी प्राप्त करने के लिए निकल जाते हैं, लेकिन दिल्ली की कुर्सी तो दूर राज्य की कुर्सी भी डोलने लगती है। ऐसा ही हुआ है उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री के साथ।

दिनेश गुप्ता, पिलखुवा, उत्तर प्रदेश

आइला

आइला,
वसे था आफत बला
मगर विद्युत उत्पादन
दूना हो चला,
इसीलिए कहना मोय
जको राखे सांईया,मार सके न कोई।

गफूर खान,, उज्जैन, मध्य प्रदेश

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