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लोक विधा में वाराणसी व मिर्जापुर के 17 सौ आर्टिस्ट सूचीबद्ध

लोक कलाकारों की प्रतिभा को पहचानते हुए उन्हें गांवों से निकालकर बड़े स्तर पर मंच दिलाने के उद्देश्य से सूबे के संस्कृति विभाग ने एक कदम आगे बढ़कर नयी तैयारी शुरू की है। वाराणसी व मिर्जापुर में चिन्हित किये गये ऐसे कलाकारों को जनपद से लेकर राज्य स्तर फिर राष्ट्रीय स्तर पर मौका देने का काम आरंभ किया गया है।

इस बारे में शासन से सैद्धांतिक सहमति मिलने के बाद आयोजनों के लिए बजट प्रस्ताव भेज गया है। प्रदेश के संस्कृति मंत्री सुभाष पांडेय ने कुछ अरसा पूर्व गांव-गांव में लोक कलाकारों को चिन्हित कराने की मंशा जतायी थी। उसी क्रम में प्रथम चरण के तहत वाराणसी व मिर्जापुर में लोक विधा से जुड़े लगभग 17 सौ कलाकार चिन्हित किये गये हैं।

जिनमें बिरहा, कजरी, धोबिया, गोड़ऊ, धुमुनिया कजरी गायन तथा नौटंकी सहित ग्रामीण इलाकों में हास्य-व्यंग्य (मिमिक्री) के कार्यक्रम पेश करने वाले शामिल किये गये हैं। साथ ही ढोलक, शहनाई, डफली, झंझ, दुक्कड़, नक्कारा आदि बजने वाले व लोक नर्तकों की तलाश की गयी है।

वाराणसी में चोलापुर, पिंडरा व काशी विद्यापीठ विकास खंड के अलावा रामनगर व चुनार में अभियान चलाकर इन कलाकारों को सूचीबद्ध किया गया है। अब उन्हें देहात से निकालकर शहरों में मंच देने के लिए लोकसंस्कृति से जुड़े कार्यक्रमों की नियमित श्रृंखला शुरू करने के उद्देश्य से शासन को बजट भेज गया है।

शासन ने प्रत्येक कार्यक्रम पर लगभग 25 हजर रुपये मुहैया कराने की मंशा जतायी है। क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र प्रमुख डॉ. लवकुश द्विवेदी के मुताबिक मकसद है कि शहरों में लोक कलाकारों के प्रोग्राम आयोजित कर स्क्रीनिंग के माध्यम से बेहतर आर्टिस्ट चुने जाएं। विभाग की ‘सांस्कृतिक डायरेक्टरी’ में उन कलाकारों का ब्योरा भी प्रकाशित किया जाएगा।

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  • Web Title:लोक कलाकारों के दिन बहुरेंगे