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गर्भपात का निर्णय पीजीआई विशेषज्ञ करेंगे

नारी निकेतन में मंदबुद्धि लड़की से बलात्कार मामले में गर्भपात का निर्णय पीजीआई के विशेषज्ञों की समिति करेगी। एडीशनल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशन जज राज राहुल गर्ग इस समिति के कोऑर्डिनेटर और सदस्य होंगे।
हाईकोर्ट के जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस अगस्टाइन जॉर्ज मसीह की खंडपीठ ने पीजीआई को दो दिन के अंदर विशेषज्ञों की यह समिति गठित करने और 10 दिन के भीतर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है।

विशेषज्ञ समिति को 13 बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए भविष्य की कार्रवाई करनी होगी। इसके तहत गर्भपात संबंधी निर्णय लेते समय समिति पीड़िता की राय भी अन्य पक्षों को रखते हुए लेगी। यदि निर्णय गर्भपात के पक्ष में जाता है तो तुरंत इस बारे में संबंधित कार्रवाई सेक्टर-32 स्थित सरकारी मेडिकल कालेज और अस्पताल में होगी तथा भ्रूण डीएनए टेस्ट आदि के लिए संभालकर रखा जाएगा, ताकि दोष साबित करने में मदद मिले। यदि पीड़िता गर्भपात का विरोध करती है तो विशेषज्ञ दल इस बारे में अपनी रिपोर्ट को देखते हुए मामला पुन: सुनवाई के लिए 1 जुलाई को हाईकोर्ट में पेश करेगा और तब निर्णय लिया जाएगा। इसके साथ ही चंडीगढ़ प्रशासन को आदेश दिया गया है कि वह पीड़िता को पीजीआई के समक्ष पेश करे ताकि गर्भपात को लेकर सभी पक्षों पर राय बनाई जा सके।
कौन होगा विशेषज्ञ समिति में
पीजीआई को इस समिति के लिए साइकेट्री, गायनी, जनरल मेडिसिन व पेडियाट्रिक विभागों से एक-एक प्रोफेसर या एडिशनल प्रोफेसर को नियुक्त करने के लिए कहा गया है। इस कोआर्डीनेट करने के लिए सेशन जज राज राहुल गर्ग की मदद ली जाएगी। चंडीगढ़ प्रशासन इसके लिए सभी इंताजम करेगा। एक्सपर्ट बॉडी की मीटिंग पीजीआई परिसर के भीतर करने के लिए कहा गया है।


प्रशासन को लताड़
हाईकोर्ट ने यूटी प्रशासन को यह कहकर लताड़ लगाई है कि जिस तरीके और प्रणाली से नारी निकेतन तथा आश्रय की व्यवस्था चल रही है, वह सही नहीं है। यदि आरोप सही पाया जाता है तो प्रशासन के आला अधिकारियों की आंखें खोलने के लिए इससे बड़ा और क्या होगा। इस संबंध में खंडपीठ ने प्रशासन के लिए कई निर्देश जारी किए हैं, जिनमें मेडिकल बोर्ड का गठन भी शामिल है। स्वास्थ्य निदेशक की अध्यक्षता में बने मेडिकल बोर्ड
हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ प्रशासन को आदेश दिए है कि स्वास्थ्य निदेशक की अध्यक्षता में मेडिकल बोर्ड का गठन किया जाए जिसमें काउंसलर, स्किन स्पेशलिस्ट व गायनेकोलॉजिस्ट को शामिल किया जाए। नारी निकेतन, आश्रय व अन्य इस तरह के संस्थानों में इस सुविधा को एक माह के भीतर लागू किया जाए। इसके साथ ही प्रताड़ना को लेकर समय-समय पर विशेषज्ञों द्वारा जांच की जानी चाहिए। मेडिकल बोर्ड व अस्पताल निशुल्क इलाज देगा।


निगरानी के लिए कमेटी
तीन एनजीओ व दो चंडीगढ़ प्रशासन के अधिकारियों की एक मोनिटरिंग कमेटी का गठन किया जाए। इसके साथ ही गृह सचिव को आदेश दिए गए हैं कि मोनिटरिंग कमेटी के सदस्यों को सप्ताह में एक बार नारी निकेतन व अन्य संस्थानों में जाने की अनुमति दी जाए ताकि वहां सुबह 7 बजे से लेकर शाम 7 बजे तक कोई भी अपनी सेवाएं दे सके। इस दौरान अगर कोई कमी पाई जाती है और कोई मेंबर इसकी शिकायत करे तो तत्काल प्रभाव से कमियों को दूर किया जाए। संस्थानों में महिलाकर्मी नियुक्त किए जाए, इसके साथ ही रसोईघर में व्यवस्थाओं को ठीक किया जाए। 


कौन है यह लड़की
नारी निकेतन में बलात्कार का शिकार बनी लड़की अनाथ है। वह 28 दिसंबर 1998 तक नई दिल्ली मिशनरी ऑफ चेरिटी की देखरेख में थी, उनके रिकार्ड के मुताबिक यह लड़की 8 नबंवर 1991 को पैदा हुई। चूंकि लड़की मानसिकरूप से विकलांग थी, इसलिए इसे चंडीगढ़ के सेक्टर 23-ए  मिशनरी ऑफ चेरिटी की देखरेख में सौंप दिया गया था। मार्च 2004 में यह लड़की यहां से भाग गई थी। जब इसे पकड़ा गया तो नारी निकेतन भेज दिया गया। 13 मार्च को उसे आश्रय में स्थानांतरित कर दिया गया।


हाईकोर्ट की टिप्पणी
यह एक तथ्य है कि एक असहाय मानसिक रूप से विकलांग लड़की से संस्थान के ही एक गार्ड द्वारा कथित तौर पर बलात्कार करना एक अपराध, प्रशासनिक लापरवाही और उन लोगों के विचित्र दृष्टिकोण की कथा कहता है, जिन पर इस संस्थान के मामलों की देख रेख का जिम्मा है।

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