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पति के साथ बेहतर तालमेल देता है आर्थिक मजबूती

पति के साथ बेहतर तालमेल देता है आर्थिक मजबूती

आईटी प्रोफेशनल आरती माथुर की तनख्वाह अपने पति से लगभग दुगुनी है। आरती बताती हैं कि शुरुआत में उनकी तनख्वाह अपने पति से कम थी, लेकिन अपनी नौकरी में जब प्रमोशन के साथ उन्हें मोटी तनख्वाह मिली तो सबसे ज्यादा खुश उनके पति राजीव ही थे और वे हमेशा उसे और बेहतर करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। राजीव और आरती की तरह आज के अधिकांश न्यू-एज कपल का कमाई को लेकर नजरिया बिल्कुल बदल चुका है और वे नहीं मानते कि पति-पत्नी दोनों में से जो अधिक कमाता है परिवार में उसी की चलती है या पारिवारिक, आर्थिक, सामाजिक मामलों में उसी का वर्चस्व रहता है। यानी परिवार को अकेले केवल अपने दम पर चलाने की पुरुष की काबिलियत को एक जेनरेशन पहले जहां उसके पौरुष और गौरव से जोड़ा जाता था वह बात अब पुरानी हो चली है। आज बहुत से परिवार ऐसे हैं जहां पत्नी पति से अधिक कमाती है। यहां तक कि प्रथम अमेरिकी महिला मिशेल ओबामा का ही उदाहरण लें तो यूनिवíसटी ऑफ शिकागो हॉस्पिटल्स में कम्यूनिटी एडवाइजर के तौर पर कार्य करने के दौरान उनकी कुल तनख्वाह अपने पति बराक ओबामा से लगभग दुगुनी थी।

पिछले दिनों हुए एक सर्वे में भी यह बात सामने आई कि अधिकांश पुरुषों को अपनी पत्नियों के साथ ‘ब्रेड-विनर’ या आíथक कर्ताधर्ता का टाइटल बांटने में कोई गुरेज नहीं, बल्कि आज के मॉडर्न विचारधारा रखने वाले पति मानते हैं कि परिवार में आर्थिक रूप से सहयोग करने के अलावा कामकाजी पत्नियां अपने पति के साथ बेहतर ढंग से तालमेल बिठा पाती हैं, क्योंकि उन्हें भी अपनी नौकरी में उसी प्रकार की परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है, जिससे पति दो-चार होते हैं। खासतौर पर बड़े मेट्रो शहरों में जहां रहन-सहन का स्टैंडर्ड काफी ऊंचा होता है और आर्थिक मजबूती सबसे अहम सवाल है। ऐसी स्थिति में पुरुष अवश्य ही समझदारी से काम लेना चाहते हैं और आर्थिक पक्ष पर पत्नी का मदद भरा हाथ उनके लिए ‘मेल-ईगो’ का प्रश्न तो कतई नहीं होता। विज्ञापन एजेंसी में कार्यरत प्रतीक शास्त्री कहते हैं, ‘मेरी पत्नी की तनख्वाह फिलहाल मुझसे अधिक नहीं है, लेकिन भविष्य में अगर मेरी पत्नी मुझसे अधिक कमाती है तो मुझे कतई परेशानी नहीं होगी बल्कि उससे ज्यादा खुशी मुझे ही होगी। मेरा मानना है कि आज के न्यू-एज कपल काफी स्मार्ट और तेज हैं, क्योंकि उन्हें हर रोज एक नई तरह की परिस्थिति का सामना करना पड़ता है और ऐसे में वे पुरानी मानसिकता को पकड़ कर किसी भी बात पर बहस नहीं रखना चाहते। शायद इसलिए आज अधिकांश पुरुष कामकाजी पत्नी को तरजीह देते हैं, फिर उस पर किसकी कमाई ज्यादा है इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।’ सामान्य तौर पर कामकाजी महिलाओं का सोचने का ढंग घरेलू महिलाओं से काफी भिन्न होता है और वे परिस्थितियों के अनुसार अपने पति के साथ बेहतर समन्वय रख पाती हैं और घर में दुगुनी तनख्वाह का आना एक अतिरिक्त  लाभ ही है, क्योंकि आíथक मजबूती से स्वाभाविक तौर पर आप एक बेहतर रहन-सहन की उम्मीद करते हैं।

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