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मासूम मां की गोद को तरस रहा है।

गत नौ दिनों से सामान्य अस्पताल के पालने में पड़ा मासूम मां की गोद को तरस रहा है। बिस्तर में पड़ा वह मासूम न ठीक से किलकारियां मारता है और न ही छोटे शिशुओं की तरह हाथ-पैर चलाता है। बल्कि एकदम शांत रहता है। मानो उसे भी एहसास है कि जन्म देने वाली निर्दयी मां ने उससे नाता तोड़ दिया। उधर, मासूम को दजर्नों माताएं अपने सीने से लगाना चाहती हैं। मगर, कानूनी अड़चन के कारण मासूम को मां की गोद नहीं मिल रही।
सिविल अस्पताल के गॉयनी वार्ड के डच्यूटी रूम में पालने में लेटा मासूम शारीरिक रूप से तो सामान्य शिशुओं की तरह है। मगर, उसका व्यवहार नन्हे-मुन्नों की तरह बिल्कुल नहीं। दिनभर वह एकदम शांत लेटा रहता है। न कुछ हरकतें करता है और न ही भूख लगने पर रोता है।

शायद मां की गोद छिन जाने का एहसास उसे भी है। वैसे इतने दिनों में भले ही उसकी मां ने उसको याद न किया हो। मगर, साइबर सिटी में ममता रखने वाली दजर्नों माताएं ऐसी हैं। जो उस मासूम को गोद में लेने को उतावली हैं। एक सप्ताह के दौरान 25 से अधिक दंपती मासूम को देखने व गोद लेने के लिए विभागीय अधिकारियों से गुजरिश कर चुके हैं। मगर, कानूनी दाव - पेंच के कारण विभाग ने बच्चा किसी को नहीं सौंपा। बल्कि मंगलवार को बच्चे को सोनीपत के बालग्राम में भेज जाएगा। प्रिंसिपल मेडिकल ऑफिसर डॉ. खजन सिंह बताते हैं कि रोजना औसतन तीन-चार दंपती बच्चे को गोद लेने के लिए अस्पताल पहुंच रहे हैं। बच्चे को अपनाने वालों में मध्यम वर्ग के अलावा संभ्रात परिवार के दंपती भी शामिल हैं। मगर, कानूनी प्रक्रिया पूरी न होने के कारण उसे किसी को गोद नहीं दिया जा सकता। बच्चा पूरी तरह से स्वस्थ है। इसलिए उसे मंगलवार को सोनीपत स्थित बालग्राम में भेज जा रहा है। उल्लेखनीय है कि रविवार, 31 मई को शहर के शक्ति पार्क से यह नवजत शिशु कूड़े के ढेर में पड़ा मिला था।

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