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मई तक डिपो का घाटा एक करोड़ से अधिक

हरियाणा रोडवेज फरीदाबाद की बसें बूढ़ी हो गई हैं। अधिकांश बसें यात्रियों का बोझ उठान में अक्षम हैं। इन्हें ठीक करने के लिए डिपो में पर्याप्त मात्रा में मैकेनिक तक नहीं। ऐसे में ये बसें निर्धारित सफर तय करने से पहले ही बीच रास्ते में ही खराब हो जाती हैं।

इससे जहां यात्रियों को भारी परेशानी हो रही है, वहीं प्रतिदिन कई सौ किलोमीटर सफर रद्द हो जाते हैं। सभी रूटों को मिलाकर प्रतिदिन औसतन 8 से 10 बसें रास्ते में खराब हो रही हैं। इससे डिपो घाटे की ओर अग्रसर हो रहा है। रोडवेज अधिकारी डिपो के बढ़ते घाटे के कई कारण बता रहे हैं।

फरीदाबाद डिपो में करीब 219 बसें हैं। इनमें मात्र 118 चलने लायक हैं। यानी एक सौ बसों का दम निकल चुका है। वर्कशाप में मैकेनिकों का टोटा है।

यहां सीएनजी बसों की संख्या 49 है। बल्लभगढ़ में सीएनजी पंप होने से दूसरे डिपो की सीएनजी बसें भी यहां आने लगी हैं। खराब होने पर उन्हें यहीं ठीक करना मुश्किल हो जाता है। यहां सीएनजी ट्रेंड मैकेनिक दो ही हैं। डीजल बसों के मुताबिक भी मैकेनिकों की संख्या पर्याप्त नहीं। ऐसे में खराब बसें जल्द ठीक नहीं हो पातीं। कर्मचारी नेता विभाग की इस व्यवस्था से दुखी हैं।

उनका कहना है कि विभाग को कर्मचारियों की कमी पूरी करनी चाहिए। मई 09 तक बल्लभगढ़ का डिपो एक करोड़ से अधिक घाटे में रहा। रोडवेज महाप्रबंधक प्रदीप कुमार का मानना है कि यह घाटा डीजल वृद्धि, कर्मचारियों की बढ़ाई गई सैलरी समेत कई कारणों से हुई है। रोडवेज को जल्द डीजल की 24 नई बसें मिलने के बाद डिपो की आमदनी बढ़ने की उम्मीद है।

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