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उद्योग लगाने में आ रही कठिनाई को दूर करने के लिए त्रिस्तरीय व्यवस्था लागू

राज्य सरकार ने प्रदेश के लघु, सूक्ष्म और मध्यम उद्योगों के लगाने में आ रही कठिनाई को दूर करने के लिए मंडल और जिला स्तर पर उद्योग बंधु में त्रिस्तरीय व्यवस्था लागू की है। इस नई व्यवस्था के तहत जिलाधिकारी की अध्यक्षता में ‘जिला उद्योग बंधु’ और  कमिश्नर की अध्यक्षता में ‘मंडलीय उद्योग बंधु’ को और अधिक प्रभावी बनाने का निर्णय लिया गया है।

उद्योगों को लगाने में विभिन्न विभागों के लाइसेंस दिलाने और एनओसी दिलाने की जिम्मेदारी जिला उद्योग केन्द्र के महाप्रबन्धक को सौंपी गई है। अब वह इस काम के लिए नोडल अफसर के रूप में कार्य करेंगे। उद्योग बंधु की बैठकों में सम्बन्धित विभागों के अधिकारियों, औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधियों के अलावा उद्यमी भी अपनी समस्या रख सकेंगे।

सरकारी प्रवक्ता ने मंगलवार को यहाँ बताया कि पिछले साल उद्योगों से सम्बन्धित 45 हजार मामले एकल मेज व्यवस्था के तहत निस्तारित किए गए और उसके पहले वर्ष 2007-08 में 48 हजर मामलों का निस्तारण इस योजना के तहत किया गया। राज्य सरकार ने यह भी निर्णय लिया है कि उद्योग विभाग में फैला इंस्पेक्टर राज खत्म किया जाए, इसके लिए उद्योगों का निरीक्षण विशेष मामलों में जिलाधिकारी की अनुमति से ही किया जाएगा।

लघु उद्योग विभाग के मुताबिक राजकीय खरीद में भाग लेने के लिए इकाईयों को ई-टेंडरिंग व्यवस्था लागू की गई है। अब उद्यमी अपने टेंडर किसी भी स्थान से इंटरनेट के माध्यम से ले सकता है और नेट के माध्यम से ही उसे जमा कर सकता है। अब उसे कार्यालय आने की आवश्यकता नहीं होगी।

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  • Web Title:उद्योगों को बढ़ावा देने के जिए राज्य सरकार की पहल