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इंश्योरेंस कराते वक्त..

कल हमने इस बात पर चर्चा की कि बीमा कराते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए और कंपनियां दो तरह के बोनस सिंपल और कंपाउड देती हैं। आज हम उसी के आगे चर्चा करेंगे।


सिंपल बोनस में कंपनियां पॉलिसी धारक को मिलने वाले बोनस को उसके फंड में जोड़ देती हैं। सिंपल बोनस टर्म के अंत या मृत्यु होने पर मिलता है। साथ ही इस तरह के बोनस पर किसी तरह का ब्याज नहीं लगता।


कंपाउंड बोनस वास्तविक राशि पर नियमित अंतराल में मिलता रहता है। यह ध्यान रखिए कि बोनस कंपनी के प्रदर्शन पर निर्भर करता है। ऐसे में बोनस मिलने की गारंटी नहीं होती।


ध्यान रखें कि प्रत्येक पॉलिसी बोनस नहीं देती। ऐसे में अगर एजेंट आपसे कहता है कि आपकी पॉलिसी 20 वर्ष में 3 लाख का 15 लाख देगी, तो यह बोनस पॉलिसी नहीं होगी, बल्कि प्रॉफिट पॉलिसी होगी।


डिस्कांउट मिलने के चक्कर में सुरक्षा कवर से समझोता न करें क्योंकि आपकी पहली प्राथमिकता सुरक्षा होती है।

पॉलिसी खरीदने से पहले कई ब्रोकरों के चक्कर लगा लेने चाहिए। एक तरफ जहां लाइफ इंश्योरेंस ले सकने की क्षमता आपकी तनख्वाह पर निर्भर करती है। वहीं कितनी लाइफ इंश्योरेंस वल्यू लेना आपके लिए हितकर है, यह भी आपकी आय पर निर्भर करता है। मसलन अगर आपकी वाíषक आय डेढ़ लाख रुपए है तो आपको कम से कम अपनी आय का आठ से दस गुना कवर का इंश्योरेंस लेना होगा।

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