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नरेगा तकनीक सहायकों व अवर अभियंताओं को निश्चित मानदेय शीघ्र ही मिलेगा

निजी प्रतिष्ठानों की तर्ज पर कमीशन आधारित व्यवस्था को जब तक बदला नहीं  जाएगा, नरेगा में भ्रष्टाचार व शिकायतें दूर नहीं होगी। इसके खात्मे के लिए सरकार प्रयासरत है। नरेगा तकनीक सहायकों व अवर अभियंताओं को निश्चित मानदेय शीघ्र ही मिलने लेगा। साथ ही उनके दायित्वों को सुनिश्चित किया जाएगा। यह विचार आयुक्त, ग्राम्य विकास मनोज कुमार सिंह ने व्यक्त किया। वह नरेगा तकनीकी सहायकों और अवर अभियंताओं के पहले सम्मेलन में बोल रहे थे।

पीडब्ल्यूडी के संघ भवन सभागार में सम्मेलन का आयोजन नरेगा तकनीकी सहायक/ अवर अभियंता वेलफेयर एसोसिएशन ने किया। इसका उदघाटन करते हुए आयुक्त ग्राम्य विकास श्री सिंह ने कहा कि तकनीकी और अवर अभियंताओं को कमीशन पर आधारित परिश्रमिक दिए जाने को वह भी सही नहीं मानते हैं। साथ ही कई गाँवों के लिए बने उनके पैनल की व्यवस्था भी सहीं नहीं है।

उन्होने कहा कि शासन नौ या दस हजर रुपए तक प्रतिमाह मानदेय तकनीकी एवं अवर अभियंताओं को देने की व्यवस्था करने जा रहा है। उन्होंने कहा कि 10 हजर करोड़ रुपए खर्च करने के बाद भी एक भी ऐसा परिवार नहीं है जो हमारी प्रसंशा करें,क्योंकि यहाँ भी लेन-देन की प्रथा चल रही है। इसको खत्म करने में वे महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकते हैं।

उन्होंने पारदíशता और ईमानदारी के साथ काम करने आह्वान किया। साथ ही तकनीकी एवं अवर अभियंताओं से कहा कि उत्पीड़न होने पर इसकी सूचना मो. 9793138777 पर सूचना दें। उन्होंने कहा कि उनके बकाए का भुगतान और निकाले गए लोगों को फिर से रखे जने के लिए आदेश कर दिया गया है।

इसके पूर्व संगठन के अध्यक्ष रघुनाथ पटेल ने अतिथियों का स्वागत करते हुए 15 हजर रुपए मानदेय सुनिश्चित करने, नियुक्त की आयु सीमा 18 से 40 वर्ष करने, नवीनीकरण की व्यवस्था खत्म करने, पद नाम कनिष्ठ अभियंता (ग्राम्य विकास) रखने और हटाए गए तकनीकी सहायकों को फिर से कार्य पर लिए जने की माँग की।

कार्यक्रम का समापन उ.प्र. राज्य कर्मचारी महासंघ (पाण्डे गुट) के अध्यक्ष सतीश पाण्डे ने किया। सम्मेलन को अपर ग्राम्य विकास आयुक्त अनुराग और उ.प्र. डिप्लोमा इंजीनियर महासंघ के महामंत्री एसपी श्रीवास्तव ने भी सम्बोधित किया।

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  • Web Title:कमीशन व्यवस्था को समाप्त करके ही नरेगा में भ्रष्टाचार रूकेगा