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हादसों का शहर बना चंडीगढ़

पीजीआई : प्यारे गुजरना न इधर से

पीजीआई में इलाज कराना जितना मुश्किल है, उतना ही मुश्किल यहां सड़क पर चलना है। पीजीआई प्रशासन बेशक इससे अंजान हैं, लेकिन हर रोज दो से तीन लोग परिसर के अंदर ही हादसों का शिकार होकर भर्ती हो रहे हैं। ये हादसे कुछ प्वाइंट्स पर ही ज्यादा हो रहे हैं।

एंट्री प्वाइंट : खतरनाक जोन
पंजाब यूनिवर्सिटी से पीजीआई में अंदर आते ही इमरजेंसी और रिसर्च ब्लाक के मोड़ पर रात को वाहनों की अकसर टक्कर हो जाती है। इसके चलते पिछले सप्ताह दो युवक घायल होकर पीजीआई इमरजेंसी में दाखिल हुए। ये दोनों पीजीआई के ही कर्मचारी हैं। 


न्यूओपीडी के टी-प्वाइंट : 3 खतरे
न्यूओपीडी की तरफ जाने के लिए तीन टी प्वाइंट आ रहे हैं। गेट नंबर एक से आते वक्त दो और तीसरा टी प्वाइंट पीजीआई को पैक की तरफ से आ रहे रास्ते पर।  इन तीनों रास्तों से होकर आने वाले लोगों को मोड़ पर आ रहे वाहनों का अंदाजा नहीं रहता, जिससे दुघर्टना के आसार रहते हैं। न्यूओपीडी की विपरीत दिशा में डॉक्टर्स के हॉस्टलों के बाहर सड़क चौड़ी न होने से पिछले सप्ताह तीन डॉक्टर घायल हुए हैं।


हालत : न सड़के ठीक, न सुरक्षा गार्ड
पीजीआई प्रशासन को अपने ही परिसर के भीतर की ये समस्याएं दिखाई नहीं दे रही हैं। इन जगहों पर न तो कोई सिक्योरिटी गार्ड तैनात किया गया है और न ही दुघर्टना से बचने को लेकर कोई साइन बोर्ड लगाया गया है।


एबुलेंस : दो गाड़ियां कंडम
एपीसी, एडवांस कार्डियक सेंटर से नेहरू अस्पताल में टेस्ट कराने के बीच दुघर्टना का शिकार हुए लोगों के लिए कोई एंबुलेंस का इंतजाम भी नहीं है। पीजीआई की दो एंबुलेंस गाड़ियां कंडम पड़ी हैं।


घायल : हफ्ते में 10
पिछले सप्ताह पीजीआई परिसर में दस लोग घायल हो चुके हैं। इनमें तीन मरीज और बाकी डॉक्टर व तीमारदार थे। इन्हें मौके पर इलाज दिया गया। दो की शिकायत पीजीआई पुलिसथाने में भी की गई। सड़क चौड़ी करने का प्लान है। दूसरा, ट्रॉमा सेंटर का काम अभी लटक रहा है। ट्रॉमा सेंटर व कार्डियक सेंटर का काम खत्म होने के बाद सभी समस्याएं दूर हो जाएंगी।

 

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