class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

स्कूल से बाहर रहने वाले बच्चों की संख्या में कमी से बाल श्रम आयोग खुश

स्कूल से बाहर रहने वाले बच्चों की संख्या में आई कमी ने बाल श्रम आयोग को उत्साहित कर दिया है। खास बात यह है कि इस मामले में बिहार देश भर में अव्वल हो गया है। इस रफ्तार को बनाये रखने के लिए बाल श्रमिक आयोग एक बार फिर बाल श्रम उन्मूलन के लिए विशेष जगरूकता अभियान शुरू करने ज रहा है। 12 जून को अंतरराष्ट्रीय बाल श्रम उन्मूलन दिवस पर आयोग एक सप्ताह के इस विशेष अभियान की शुरुआत करेगा।

इस सिलसिले में आयोग श्रम संसाधन विभाग तथा यूनीसेफ के सहयोग से 12 जून को राजधानी स्थित ए.एन. सिन्हा इन्स्टीच्यूट में एक कार्यशाला आयोजित करेगा। आयोग के अध्यक्ष रामदेव प्रसाद ने मंगलवार को संवाददाता सम्मेलन में बताया कि बाल श्रम उन्मूलन पर सुझव देने के लिए मानवाधिकार आयोग, महिला आयोग, पिछड़ा वर्ग आयोग, अति पिछड़ा वर्ग आयोग और महादलित आयोग को भी बुलाया गया है। इसके अलावा 12 से 18 जून तक जिला और प्रखंड स्तर पर भी कई कार्यक्रम आयोजित किये जाएंगे।

उन्होंने कहा कि बाल श्रम उन्मूलन अभियान की देन है कि राष्ट्रीय स्तर पर स्कूल से बाहर बच्चों की संख्या में कमी आई है। लेकिन सर्वाधिक कमी बिहार में आई है। देशभर में 22.5 प्रतिशत बच्चे  प्राईवेट स्कूल में पढ़ते हैं जबकि बिहार के मात्र 7.4 प्रतिशत। बावजूद बाल श्रमिकों की संख्या के मामले में बिहार का स्थान देशभर में चौथा है।

इससे छुटकारा पाने के लिए क्रांति की आवश्यकता है लेकिन आज तक यहां आंदोलन भी नहीं हो सका है। इसलिए आयोग ने राज्य भर में एक सप्ताह तक विशेष अभियान चलाने का फैसला किया है।  प्रदेश से पंचायत स्तर तक कार्यक्रम होंगे जिसमें स्वयंसेवी संस्थाओं और ट्रेड यूनियनों का भी योगदान होगा। संवददाता सम्मेलन में आयोग के उपाध्यक्ष चंदेश्वर प्रसाद चंद्रवंशी, सदस्य अजय कुमार सिंह और सचिव बिहारी दास भी उपस्थित थे।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:बाल श्रम उन्मूलन के लिए विशेष जगरूकता अभियान