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मैडम नहीं महोदया बोलें

हिन्दुस्तान में लोकतंत्र के मंदिर लोकसभा में लोकसभाध्यक्ष को ‘सर’ कहा जता है। क्या भारत में आज भी अंग्रेजों की अंग्रेजियत नहीं गई। कुछ समय पूर्व भी राष्ट्रपति जब प्रथम बार महिला बनी थी तो यह सवाल उठा था कि अब राष्ट्रपति को किस संबोधन से संबोधित किया जएगा। इस संबंध में संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्यप के अनुसार पद जेंडर न्यूट्रल यानी लिंग निरपेक्ष होता है। पर मेरा मानना है कि क्या राज, महाराज व सम्राट पद नहीं है? फिर उनके स्त्रीलिंग क्रमश: रानी, महारानी व साम्राज्ञी क्यों? क्या हम लोग अपने संसद के अंदर हिंदी का आदर करते हुए लोकसभा अध्यक्ष को ‘महोदय’ या ‘महोदया’ कहना अनिवार्य नहीं कर सकते। निश्चित ही यह सर और मैडम से अच्छा सुनने में लगता।

-विभा झा, सरस्वती गार्डन, नई दिल्ली


समझ से बाहर की बात


टीवी में बताते हैं कि शराब, तम्बाकू, बीड़ी, सिगरेट आदि पीने से कैंसर जैसी भयानक बीमारी हो जाती है। एक साल में मरने वालों की संख्या लाखों में पहुंच जाती है। समझ में नहीं आता कि अगर ये चीजें इतनी खराब हैं तो फिर ये चीजें इतनी खुलेआम क्यों बिकती हैं?

-अनमोल दुबे, कक्षा-5, राजेन्द्र नगर 

सुविधा दो रिजल्ट लो!


मुझे दिल्ली सरकार को बधाई देनी है कि उन्होंने शिक्षा विभाग पर ध्यान देकर सरकारी सकूलों को 10 और +2 के बोर्ड परीक्षा फल को सुधारा है। इसके लिए शिक्षामंत्री अरविन्दर सिंह लवली और स्वयं मुख्यमंत्री शीला दीक्षित बधाई के पात्र हैं। स्कूलों का बोर्ड का परिणाम और सामान्य रूप से शिक्षा का स्तर बहुत सुधर सकता है यदि प्रत्येक स्कूल में सारे अध्यापक अपनी ड्यूटी पर मौजूद रहें। उन्हें आधारभूत सुविधाएं जैसे कमरे, बैठने का स्थान, पढ़ने का सामान, पीने का पानी, बालक-बालिकाओं के लिए अलग शौचालय सब उपलब्ध हों।


-यू. सी. पाण्डेय, द्वारका-10, नई दिल्ली

शाबाश अगाथा


28 मई को कुल मिलाकर 58 मंत्रियों ने शपथ ली जिनमें से 21 को छोड़कर शेष सब ने अंग्रेजी में शपथ ली। अफसोस इस बात का भी है कि वे सभी हिन्दी भाषा अच्छी तरह बोल व समझ सकते हैं। लेकिन इस मामले में बाजी मारी कुमारी अगाथा ने। सबसे कम आयु की अगाथा संगमा स्वयं एक अहिन्दी भाषी प्रदेश से हैं तथा उन्होंने मंत्रीपद की शपथ ग्रहण करते समय जिस स्पष्टता मधुरता तथा रसता का परिचय देते हुए हिन्दी का उच्चरण किया, उसे सुनकर वहां उपस्थित सभी श्रोता एवं दर्शक गदगद थे।


-इन्द्र सिंह धिगान, किंग्जवे कैम्प, दिल्ली


शिक्षा के मायने


किसी भी पाठ्यक्रम की कोशिश यही रहती है कि छात्र उसमें अपनी बौद्धिक क्षमताओं को विकसित करके आगे कुछ सोचें। आजकल छात्र भले ही 99 फीसदी से भी ऊपर नंबर हासिल करने लगे हैं, लेकिन उनका बौद्धिक स्तर और चिंतनशीलता उस गति से विकसित नहीं हो रही। तात्कालिक परिणाम तो काफी उत्साहजनक होते हैं, लेकिन दूरगामी परिणाम छात्र के लिए खतरनाक साबित हो सकते हैं।

-राजीव मल्होत्रा, चंडीगढ़


उगले हीरे मोती


कैसे गाएं?
चंद्रबिजेता की धरती
बंजर होती
कैसे गाए-ये
उगले हीरे मोती

-गफूर ‘स्नेही’, नानाखेड़ा, उज्जैन

 

हबीब तनवीर


रंगमंच को नई जिंदगी देने वाले और खुद की जिंदगी को मंच बना देने वाले हबीब तनवीर को सलाम।
 

-नवीन अफसाना

 

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