class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

मानसून सत्र में गायब रहेंगे चार चर्चित चेहरे

विधानमंडल के मानसून सत्र में कई चेहरे नजर नहीं आएंगे। 17 विधायक तो एमपी बन गए। मगर चार ऐसे भी हैं जो कहीं न रहे। इधर के न उधर के। लंबे अरसे के बाल्ल विधानसभा रमई राम की गैर-हाजिरी को महसूस करेगा। रामजी सत्ता में रहें या विपक्ष में, सदन के भीतर आकर्षण के केंद्र होते थे। मंत्री रहने के दौरान उनके कद को लेकर हंसी मजक होती रहती थी। वे खड़े होकर जवाब दे रहे होते थे, विपक्ष से आवाज आती-मंत्रीजी बैठकर क्यों जवाब दे रहे हैं।

रमई राम राजद के विधायक थे। इस्तीफा देकर कांग्रेस में गए। गोपालगंज से लड़े और हार गए। विधानमंडल के पिछले सत्र में नागमणि कृषि विभाग के कैबिनेट मंत्री की हैसियत से जवाब दे रहे थे। राजद के टिकट पर झरखंड के चतरा से चुनाव लड़े। इसके चलते कैबिनेट और विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा देना पड़ा। चतरा में उन्हें चौथे नम्बर पर संतोष करना पड़ा। नागमणि अपनी पत्नी सुचित्रा सिन्हा की जगह मंत्री बने थे। सदन में श्रीमती सिन्हा तो विधायक की हैसियत से नजर आएंगी, नागमणि पूरे परिदृश्य से ओझल रहेंगे।

नौजवान विधायक ललन पासवान विधानसभा के भीतर मुस्तैदी से आवाज बुलंद करते थे। पहली बार चेनारी सुरक्षित विधानसभा क्षेत्र से जदयू के टिकट पर चुनाव जीते। मगर साल भर के भीतर ही सरकार के विरोध में बोलने लगे। जदयू ने उनके ऊपर अनुशासनिक कार्रवाई की। मंत्रिमंडल विस्तार के समय उनकी चर्चा चली। पर, विश्वसनीयता के सवाल पर उन्हें शामिल नहीं किया गया।

लोकसभा चुनाव से पहले ललन ने जदयू से नाता तोड़ा। विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दिया। सासाराम संसदीय क्षेत्र से राजद के टिकट पर चुनाव लड़े। हार गए। वे उप चुनाव लड़ते हैं तो पांच साल के भीतर तीन चुनाव लड़नेवाले दूसरे विधायक होंगे।रमई राम भी इसी श्रेणी में आएंगे।

मुंगेर से राजद के टिकट पर चुनाव लड़े रामबदन राय पुराने राजनीतिक कार्यकर्ता हैं। इसलिए मौसम की परख भी है। राजद से जदयू में आकर विधान पार्षद बन गए। उनके लंबे-चौड़े दावे को देखते हुए राजद ने टिकट दे दिया। हार हो गई। वह भी विधान परिषद में नजर नहीं आएंगे। परिषद की लॉबी में उनका डबल रोल मशहूर रहता था। सदन के अंदर सरकार का समर्थन और बाहर सरकार का विरोध।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:ये बेचारे..कहीं के ना रहे