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न तो विरोधियों पर हमला और न आक्रमण का जवाब

न विधान सभा की 17 सीटों के उपचुनाव की चर्चा और न ही विधान परिषद् की 24 सीटों के चुनाव को लेकर कोई बात। न तो राजनीतिक विरोधियों पर कोई हमला और न ही उनके आक्रमण का जवाब। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की तीन दिनों की विकास यात्रा इस बार राजनीति से पूरी तरह अछूती रही। औरंगाबाद, डेहरी-ऑन-सोन, मोहनिया, राजपुर, डुमरांव और बिहिया में मुख्यमंत्री ने लोगों को आठ बार संबोधित किया लेकिन कहीं किसी दल की चर्चा नहीं की।

विकास यात्रा के दौरान बिहार को विशेष राज्य का दज्र देने के अलावा और कोई बात नहीं हुई। हां, उन्होंने यह जरूर कहा कि जो लोग विशेष राज्य का दज्र देने की मांग का मजाक उड़ायेंगे, जनता उनका मजाक उड़ा देगी। औरंगाबाद की सभा में उन्होंने अंत में लोगों को इस बात के लिए धन्यवाद जरूर दिया कि उन्होंने लोकसभा के चुनाव में जद यू उम्मीदवार सुशील कुमार सिंह और महाबली सिंह को विजयी बनाया लेकिन साथ ही इन सांसदों को उन्होंने यह भी याद दिला दिया कि जनता ने उन्हें काम करने के लिए चुना है।

मुख्यमंत्री की सभा में विधान सभा के उपचुनाव और विधान परिषद के चुनाव के लिए टिकट के दावेदार भारी संख्या में जुटते थे। कैमूर और रोहतास जिले में विधान सभा की तीन सीटों रामगढ़, चैनपुर और चेनारी के लिए उपचुनाव होने हैं। इन सीटों पर चुनाव लड़ने के दावेदार नेताओं के नाम और उनकी तस्वीरों वाले पोस्टर जगह-जगह वाहनों पर दिखाई पड़ रहे थे। मुख्यमंत्री का ध्यान खींचने के लिए नेताओं के बैनर और माला लिये लोग जगह-जगह खड़े थे। लेकिन उन्होंने ऐसे लोगों को कहीं तरजीह ही नहीं दी।

डुमरांव में भाजपा या जद यू के किसी नेता को मंच से बोलने की इजाजत नहीं मिली जबकि मंच पर दोनों दलों के कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे। एक जगह तो दोनों दलों के जिलाध्यक्षों तक को मंच पर इंट्री नहीं मिली। मुख्यमंत्री का संदेश साफ था कि वे बिहार को विशेष राज्य का दज्र देने की मांग में किसी राजनीति को शामिल नहीं करना चाहते हैं।

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  • Web Title:राजनीति से अछूती रही नीतीश की विकास यात्रा