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रवींद्र रावल की कुर्सी गई

जिला एवं सत्र न्यायधीश एसपी सिंह की अदालत ने म्यूनिसिपल इलेक्शन ट्रिब्यूनल के उस फैसले को सही करार दिया है, जिसमें नगर परिषद प्रधान रवींद्र रावल का चुनाव अवैध घोषित करते हुए उसे रद्द करने की बात कही गई थी। अदालत ने प्रशासन व रवींद्र रावल द्वारा म्यूनिसिपल इलेक्शन ट्रिब्यूनल के फैसले पर रोक लगाने के लिए दायर की गई अपील को खारिज करते हुए डीसी को निर्देश दिया है कि अब नए सिरे से नगर परिषद के प्रधान पद का चुनाव कराया जाए। रावल महज एक वर्ष ही प्रधान पद रह सके। अदालत के इस फैसले से कांग्रेस को गहरा झटका लगा है। 

भाजपा नेता व पार्षद वीके सूद ने पिछले साल 2 जून को रावल के चुनाव को म्यूनिसिपल इलेक्शन ट्रिब्यूनल के समक्ष चुनौती दी थी। सूद का कहना था कि प्रधान पद का चुनाव निष्पक्ष तरीके से नहीं हुआ है। चुनाव के दौरान जरूरी गोपनीयता कायम नहीं रखी गई। पदाधिकारियों के चुनाव में भी अनियमितताएं बरती गईं। राजनीतिक व प्रशासनिक हस्तक्षेप के आरोप भी लगाए गए। दो मतपत्रों पर निशान लगा हुआ था।

सूद के वकील अजय कौशिक व रजनी का कहना है कि मतपत्रों पर निशान लगाया जाना और वोट का नंबर बताना गलत था। इससे चुनाव की गोपनीयता भंग हुई थी। म्यूनिसिपल इलेक्शन ट्रिब्यूनल की न्यायधीश एवं सिविल जज सीनियर डिवीजन अंशु शुक्ला ने 4 मई को म्यूनिसिपल इलेक्शन रूल्स 1978, एक्ट 1973 के तहत सुनाए गए फैसले में प्रधान पद का चुनाव रद्द कर दिया था।

इसके बाद जिला प्रशासन व रवींद्र रावल की तरफ से ट्रिब्यूनल के फैसले के खिलाफ जिला सेशन जज की अदालत में अपील दायर की गई थी। सोमवार को सेशन जज ने म्यूनिसिपल इलेक्शन ट्रिब्यूनल के फैसले को जायज ठहराते हुए नगर परिषद प्रधान रवींद्र रावल का चुनाव रद्द करने का फैसला सुना दिया।

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