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तनाव हो जाए छूमंतर

तनाव हो जाए छूमंतर

स्वस्थ जीवन के लिए यह अत्यंत ही जरूरी है कि तनाव को पास न फटकने दिया जए। पर वर्तमान जीवनशैली में शायद ही कोई हो, जिसे किसी-न-किसी रूप में तनाव का सामना न करना पड़ रहा हो। लोगों के पास समय की कमी है और हर कदम पर उन्हें कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में स्वाभाविक रूप से लोग पहले के मुकाबले अधिक तनावग्रस्त रहने लगे हैं। पर यह भी सच है तनाव की अधिकता न सिर्फ मानसिक, बल्कि शारीरिक स्वास्थ्य के लिए भी घातक है। ऐसे में जरूरी है कि दिनचर्या और मानसिकता कुछ इस तरह से बनाई जाए, ताकि तनाव की मात्रा को कम किया जा सके।

तनाव से बहुत ज्यादा परेशान होने की जरूरत नहीं है। ऐसा सोचें कि यह स्थिति सिर्फ आपके ही साथ नहीं है। यह सोचते ही आप कुछ हल्का महसूस करने लगेंगे। तब आप नए सिरे से अपने तनाव के कारणों को ढूंढ़ने के लिए प्रवृत्त हो सकेंगे।एक और जरूरी बात यह है कि तनाव के बारे में सोच-सोच कर घुटते न रहें, बल्कि जो भी आपके करीब हो, उससे अपनी परेशानियों को जरूर शेयर करें। उसकी सलाह से आपका आत्मविश्वास बना रहता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि रो लेने से मन हल्का हो जाता है और ऐसे में तनाव से मुक्ति के नए रास्ते आसानी से नजर आने लगते हैं।  इस संबंध में एक महत्वपूर्ण बात अपनी दिनचर्या से संबंधित है। तनाव से बचे रहें, इसके लिए सुबह से लेकर रात तक के अपने रुटीन पर ध्यान दें। हर काम का एक समय सुनिश्चित करें और जहां तक संभव हो सके, अपनी दिनचर्या का पालन करें। सबसे जरूरी है कि अपने खानपान पर उचित ध्यान दें।

कोई भी व्यक्ति पूर्ण नहीं होता और न ही किसी को सारी चीजें हासिल हो जाती हैं। ऐसे में कुछ पाने के लिए हमेशा चिंताग्रस्त न रहें, बल्कि यह सोचें कि आपने उसे पाने के लिए कितनी मेहनत की है या परिस्थितियां आपके कितने अनुकूल या प्रतिकूल हैं। व्यायाम और योग-ध्यान से भी तनाव को कम करने में मदद मिलती है। इसलिए इस बारे में किसी एक्सपर्ट की सलाह लें और उसके बताए रास्ते पर चलें।स्वस्थ जीवन के लिए यह अत्यंत ही जरूरी है कि तनाव को पास न फटकने दिया जए। पर वर्तमान जीवनशैली में शायद ही कोई हो, जिसे किसी-न-किसी रूप में तनाव का सामना न करना पड़ रहा हो। लोगों के पास समय की कमी है और हर कदम पर उन्हें कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में स्वाभाविक रूप से लोग पहले के मुकाबले अधिक तनावग्रस्त रहने लगे हैं। पर यह भी सच है तनाव की अधिकता न सिर्फ मानसिक, बल्कि शारीरिक स्वास्थ्य के लिए भी घातक है। ऐसे में जरूरी है कि दिनचर्या और मानसिकता कुछ इस तरह से बनाई जाए, ताकि तनाव की मात्रा को कम किया जा सके।

तनाव से बहुत ज्यादा परेशान होने की जरूरत नहीं है। ऐसा सोचें कि यह स्थिति सिर्फ आपके ही साथ नहीं है। यह सोचते ही आप कुछ हल्का महसूस करने लगेंगे। तब आप नए सिरे से अपने तनाव के कारणों को ढूंढ़ने के लिए प्रवृत्त हो सकेंगे।एक और जरूरी बात यह है कि तनाव के बारे में सोच-सोच कर घुटते न रहें, बल्कि जो भी आपके करीब हो, उससे अपनी परेशानियों को जरूर शेयर करें। उसकी सलाह से आपका आत्मविश्वास बना रहता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि रो लेने से मन हल्का हो जाता है और ऐसे में तनाव से मुक्ति के नए रास्ते आसानी से नजर आने लगते हैं। 
इस संबंध में एक महत्वपूर्ण बात अपनी दिनचर्या से संबंधित है। तनाव से बचे रहें, इसके लिए सुबह से लेकर रात तक के अपने रुटीन पर ध्यान दें। हर काम का एक समय सुनिश्चित करें और जहां तक संभव हो सके, अपनी दिनचर्या का पालन करें। सबसे जरूरी है कि अपने खानपान पर उचित ध्यान दें।

कोई भी व्यक्ति पूर्ण नहीं होता और न ही किसी को सारी चीजें हासिल हो जाती हैं। ऐसे में कुछ पाने के लिए हमेशा चिंताग्रस्त न रहें, बल्कि यह सोचें कि आपने उसे पाने के लिए कितनी मेहनत की है या परिस्थितियां आपके कितने अनुकूल या प्रतिकूल हैं। व्यायाम और योग-ध्यान से भी तनाव को कम करने में मदद मिलती है। इसलिए इस बारे में किसी एक्सपर्ट की सलाह लें और उसके बताए रास्ते पर चलें।

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