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बायोफ्यूल्स

जैविक ईंधन या बायोफ्यूल नवीकृत ऊज्रा होती है और यह तरल अवस्था में प्राप्त होते हैं। यह अनाज और जानवरों की चर्बी से निर्मित होते हैं। इसके इन्हीं मूलभूत तत्वों को बायोमास कहा जाता है। सबसे प्रचलित बायोमास है मक्का। अन्य बायोमास में जौ, गन्ना, सोयाबीन, राई और कुछ अन्य पारंपरिक कच्ची फसलें हैं। सबसे जने-माने बायोफ्यूल्स में ईथेनॉल और बायोडीजल हैं।

ईथेनॉल ऐसी एल्कोहल है जो आमतौर पर पी जने वाली व्हिस्की या बीयर में मिलने वाले एल्कोहल से अलग होता है। यह अनाज आधारित होती है। इथेनॉल का लक्ष्य है प्रदूषण घटना, ग्रीनहाउस गैसों का उत्सजर्न कम करना और पेट्रोलियम आधारित ईंधनों पर निर्भरता कम करना।

इसके बावजूद, इथेनॉल उत्पादन के पर्यावरण पर असर को देखकर सवाल उठते हैं। इसके उत्पादन में अनाज की बेहद खपत होती है जिसका असर खाद्यआपूर्ति पर पड़ता है। इसी तरह बायोडीजल भी एक नवीकृत तरल ईंधन है जो सोयाबीन, राई या जनवरों की चर्बी से बनता है। अपनी रासायनिक प्रकृति में यह पेट्रोलियम आधारित डीजल के काफी निकट होता है जिससे वाहनों के इंजनों और कलपुज्रो पर विपरीत असर पड़ता है।

बायोफ्यूल्स अच्छा विचार तो है, लेकिन जब-तब इसके विभिन्न पहलुओं पर बहस उठती रही है। इन्हें पेट्रोल आधारित ईंधनों से साफ माना जता है, लेकिन इस्तेमाल में ऐसा नहीं है। माना ज रहा है कि यदि बायोफ्यूल्स का निर्माण होता रहा तो पर्यावरण संबंधी समस्या में इजफा ही होगा।

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