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कामरेड पर लांछन

माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी सिद्धांत और व्यवहार के जबरदस्त अंतर्विरोध में फंस गई है। पार्टी लोकसभा चुनाव में करारी हार के सदमे से उबर पाती, उससे पहले राज्यपाल ने केरल माकपा के सचिव और पोलित ब्यूरो के सदस्य पिनारायी विजयन पर सीबीआई को  मुकदमा चलाने की इजजत देकर उसे करारा झटका दिया है।

पोलित ब्यूरो के पहले सदस्य पर भ्रष्टाचार का मुकदमा शुरू होने से माकपा की सत्ता के ढहते दुर्ग के साथ उसकी ईमानदारी की दुग्ध धवल छवि भी स्याह होती दिख रही है माकपा भले इसे राजनीति प्रेरित और राज्य सरकार और महाधिवक्ता की राय के खिलाफ जकर दी गई राज्यपाल आरएस गवई की इस अनुमति को संवधानिक परंपरा के खिलाफ बताए पर विजयन बेदाग हैं, ऐसा उनकी पार्टी के लोग और एलडीएफ के सहयोगी दल भी नहीं मानते।

मुख्यमंत्री वीएस अच्युतानंदन बाहर भले न कहें पर पार्टी के भीतर विजयन पर कार्रवाई के लिए सबसे ज्यादा दबाव वे ही बनाए हुए हैं। एलडीएफ के ज्यादातर दलों ने कोई प्रतिक्रिया नहीं जताई है, जबकि भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का कहना है कि वह नहीं मानती कि यह मुकदमा राजनीति से प्रेरित है।

हालांकि विजयन और अच्युतानंदन के बीच लंबे समय से घमासान चल रहा है और दो साल पहले दोनों सार्वजनिक रूप से झगड़ने के कारण पोलित ब्यूरो से निलंबित किए ज चुके हैं। अब विजयन के मामले में कमजोर हो चुकी  माकपा की स्थिति सांप-छछूंदर जसी हो गई है। वह उन्हें निगल भी नहीं सकती और उगल भी नहीं सकती।

अगर केरल में संगठन और उसके आर्थिक स्रोतों पर जबरदस्त पकड़ रखने वाले विजयन को निकाला जता है तो पार्टी कमजोर होगी और अगर नहीं निकाला जता है तो पार्टी की छवि मटियामेट होगी और आगामी विधानसभा चुनाव में उसकी गति लोकसभा से भी बुरी होगी। ऐसे में भूमंडलीकरण, उदारीकरण, अमेरिकी साम्राज्यवाद और सांप्रदायिकता से लोहा लेने का दंभ भरने वाली माकपा के पास अपने जख्म सहलाने और कभी राज्यपाल के पुतले जलाने व कभी काला दिवस मनाने के अलावा कोई चारा नहीं दिख रहा है।

माकपा ने सिंगुर और नंदीग्राम विवाद के बाद ऐसी ही हरकत पश्चिम बंगाल में राज्यपाल गोपाल गांधी के खिलाफ भी की थी। फर्क इतना है कि केरल में पार्टी राज्यपाल के साथ अपने मुख्यमंत्री के प्रति भी वसा ही रुख अपनाती रहती है। जिद और अनैतिकता पर खड़े इन विरोधी तेवरों से माकपा का उद्धार नहीं होगा। अगर उसे अपनी खिसकती जमीन बचानी है तो एक तरफ विचारधारा की कट्टरता छोड़ने और दूसरी तरफ विजयन जसे नेताओं पर सख्त कार्रवाई का साहस दिखाना ही होगा।

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