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गरीबों को मत चिढ़ाएं ममता दी

ममता दी फिर से रेलमंत्री बनने पर आपको बधाई। 500 रुपए तक मासिक आय वालों को 20 रुपए का मासिक पास देने की बात ऐसी लगी, जैसे आप गरीबों को चिढ़ा रही हैं। इतनी कम आमदनी वाला कोई नहीं है, अगर हो भी तो आपकी रेल में बैठकर वह रोज कहां जएगा? आपको गरीबों, मजदूरों की अधिक चिंता है तो आप सामान्य डिब्बे पर ध्यान देने की कृपा करें। गरीबों को ‘गरीब रथ’ नहीं चाहिए ‘गरीब गाड़ी’ चाहिए। जो समय पर चले, सुरक्षित यात्रा दे। रेलवे आरक्षण पर दलालों का कब्ज है, उससे मुक्ित चाहिए। आप से बड़ी उम्मीदें हैं।
कौशल किशोर दुबे, साहिबाबाद

बंदरबांट के नायाब तरीके

दिल्ली में बन रहे ऊपरगामी पैदल पारपथ पुलों को पास करने वाले नेताओं, अफसरों और इंजीनियरों को नमन करना चाहता हूं। धन्य हैं वे, जिनकी कृपा से ऐसे पुल बन रहे हैं, जिसे पार करने में लोग सौ बार जरूर सोचेंगे। 100 मीटर से कम की दूरी पार करने के लिए एक किलोमीटर की घुमावदार सीढ़ियां पार करके गंतव्य को पहुंचना तेजी से भाग रही दिल्ली को कैसे गवारा होगा? पता चला है कि हमारे नगर निगम के नेता जब चीन, कोरिया और जपान के सरकारी दौरे पर गए थे तो उन्हें यह ऊपरगामी पुल इतना पसंद आया कि वे इसे दिल्ली की धरा पर भागीरथ प्रयास करके उतार दिए। हजरों करोड़ की बंदरबांट के बाद उस विदेशी स्कीम को आयोग्य घोषित कर दिया जता है। धन्य है देश और इसके नेता।
राकेश रंजन, जनकपुरी, नई दिल्ली

संस्कृति से खिलवाड़

बिहार सरकार के संस्कृति विभाग ने देशरत्न डॉ. राजेन्द्र प्रसाद के कृतित्व व व्यक्ितत्व पर एक लेख आमंत्रित किया था। इस लेख को जमा करने की अंतिम तिथि 26 मार्च थी। दिल्ली के हिन्दुस्तान अखबार में 23 मार्च को इसका विज्ञापन निकाला गया था। अब मेरी समझ में यही नहीं आ रहा था कि तीन दिन के अंदर तीन हजर शब्दों में एक स्वतंत्रता सेनानी व पूर्व राष्ट्रपति की जीवनी और राजनीतिक, कूटनीतिक उपलब्धियों को कोई कैसे लिखकर भेजेगा कि वह साधारण या रजिस्ट्री डाक से पटना पहुंच जए। यह बिहार की अस्मिता के साथ खिलवाड़ है, और महापुरुषों का अपमान भी।
के लि डे, वशाली, गाजियाबाद

यूपीए का सामाजिक प्रेम

यूपीए स्टाइल का सामाजिक न्याय का वर्णन पढ़ने को मिला। सामाजिक न्याय के कारवां में महिला राष्ट्रपति, मुस्लिम उपराष्ट्रपति, अल्पसंख्यक प्रधानमंत्री, दलित स्पीकर व आदिवासी डिप्टी स्पीकर आदि की ताजपोशी की पंद्रहवीं लोकसभा में उल्लेख है। यह हमारे लिए गर्व की बात है। परंतु इन सबसे पहले ये सभी महान हस्तियां भारतीय हैं, हिन्दुस्तानी हैं। उसके बाद इनकी सर्वोच्चता आती है। लोकतंत्र की मजबूती के साथ इनकी मेहनत, लगन, जमीनी जकड़न, इनके इरादे व इनकी जनता सेवा से है।
राजेन्द्र कुमार सिंह, रोहिणी, दिल्ली

वोट के बाद जनता पर चोट

खत्म हुए वोट
पड़ने लगी चोट
पानी-बिजली गुल
वादे सब ढुल-मुल

 भगवान स्वरूप नागर, राजौरी गार्डन

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