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संकट प्रबंधन

संकट प्रबंधन में आध्यात्मिक मूल्यों का अहम योगदान होता है। इससे इनकार नहीं किया जा सकता। अगर कोई शख्स पांच मानवीय मूल्यों में यकीन रखता है और उन पर डटा रहता है, तो उसके जीवन में हमेशा सामंजस्य की सरिता प्रवाहित होती रहेगी।

निजी बनाम कंपनी के मूल्य
कई बार लोग आपसे भी पूछते होंगे कि अगर आपके निजी मूल्यों और कंपनी के मूल्यों में टकराव की नौबत आ जाए, तो आप क्या करेंगे? इसका जवाब ये है कि मूल्य कैसे भी हों, उनका आधार रूहानी ही होता है। संकट तब पैदा होता है, जब आप अहंकार और आत्म केंद्रित इरादे के साथ अपने वल्यूज गढ़ लेते हैं।

वरना हर मानवीय मूल्य की संरचना में ऐसा कुछ न कुछ जरूर है, जो किसी भी स्थिति में मेलजोल और मधुरता का खात्मा नहीं होने देता।  मिसाल के तौर पर सच बोलना हमेशा अच्छा है, लेकिन किसी को जलील करने के अंदाज में नहीं। इसी प्रकार किसी से सहयोग करना अच्छा है, लेकिन बदनीयती के साथ नहीं। संकट प्रबंधन में मानवीय मूल्यों का योगदान तभी मुमकिन है, जब अन्य मूल्य की उपेक्षा न हो।

- अगर आप सत्य को लेकर दृढ़ हैं, तो आपमें नेकनीयती और साहस जरूरी है, जो  आत्म विश्वास, शांति, स्नेह और अहिंसा का भाव रखने से ही आएगा। 

- अगर आपमें नेकनीयती मजबूत है, तो आप विश्वास कायम करने, शांत रहने और प्रेम से अपनी बात कहकर संकट का समाधान करने में कामयाब रहेंगे। 

- अगर आप शांत प्रकृति के हैं, तो आप में सच्च, संयमित और क्षमाशील होने का गुण स्वत: विकसित हो जाएगा।

- अगर आप स्नेही और मेलजोल से काम करने वाले हैं, तो सच्चई और नेकनीयती आपके व्यक्तित्व में स्वत: आ जाएगी और आप सम्मान के साथ किसी भी संकट से पार पा लेंगे।

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