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भ्रष्टाचार के खिलाफ पब्लिक मूवमेंट की जरूरत : केजे राव

निर्वाचन आयोग के पूर्व विधि सलाहकार केजे राव ने कहा है कि भ्रष्टाचार भारत की सबसे बड़ी समस्या बन गई है। यह कैंसर का रूप धारण कर चुका है। इसके खिलाफ पब्लिक मूवमेंट की जरूरत है। लोग चाहें तो वे इस आंदोलन का नेतृत्व करने को तैयार हैं। राव ने शनिवार को पत्रकार सम्मेलन में  कहा कि भारत में अफसर अधिक भ्रष्ट हैं लेकिन उनको बेईमानी करना राजनीतिज्ञ सिखाते हैं।

नेताओं और नौकरशाहों की विदेशी बैंकों में जमा बड़ी राशि की जांच कराने और इसे वापस लाने के लिए कोई सरकार कदम नहीं उठाना चाहती। इसका मतलब है कि हमाम में सभी नंगे हैं। उन्होंने केन्द्र सरकार से मांग की कि विदेशों में जमा काले धन का ब्यौरा सार्वजनिक करे। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के लिए जनता भी जिम्मेदार है। ड्राइविंग लाइसेंस और राशन कार्ड बनाने में परेशानी से बचने के लिए सौ दो सौ रुपए देकर काम कराना लोग आसान समझते हैं। यही से शुरू हो जाती है बेईमानी।


राव बोले कि किसी भी दल से देश के कल्याण की उम्मीद नहीं दिखती है। दलों में खुद ‘इनर डेमोक्रेसी’ नहीं है। फिर वे बेहतर शासन क्या देंगे? हर दल के नेता भाई-भतीजों को ही ऊपर उठाते हैं। जमीनी कार्यकर्ताओं को मौका नहीं देते हैं। सभी दलों में आंतरिक चुनाव जरूरी है। राव का मानना था कि क्षेत्रीय दलों का बढ़ता प्रभाव देश के लिए घातक है। बहुदलीय सरकार में छोटे दल बड़े दलों ब्लैकमेल करते हैं। मालदार मंत्रालय के लिए लड़ाई होती है। उन्होंने कहा कि जनता, दलों के रवये से निराश हो चुकी है।

यही कारण है कि वह वोट डालने नहीं जती। बिहार में बाढ़ के स्थाई नियंत्रण का काम इसीलिए नहीं हो रहा है कि अगर इसका हल हो जाता है तो बाढ़ राहत के नाम पर हर साल करोड़ों का घपला नहीं किया जा सकेगा। बाढ़ राहत के नाम अभी तक हुए जितनी राशि खर्च हुई है शायद उससे कम खर्च में बाढ़ का स्थाई निदान हो जाए। उन्होंने कहा कि ऑडिट सिस्टम को पारदर्शी और ईमानदार बनाने की जरूरत है तभी घोटालों को रोका जा सकेगा। आज ऑडिट फाइव स्टार होटलों में हो रहा है। यही वजह है कि हजार-दो हजार करोड़ का घपला कोई बड़ी बात नहीं रह गई। उन्होंने कहा कि नरेगा में कितना खर्च हुआ, कहां हुआ, इससे किसको लाभ हुआ - यह बताने वाला कोई नहीं है। सरकारें नहीं चाहती है कि बेईमानी रुके। यही वजह है कि प्रदूषण रोकने के नाम पर पॉलीथिन बैग पर प्रतिबंध तो लगा दिया जाता है लेकिन इसे बनाने वाली फैक्ट्रियों को नहीं बंद किया जाता।

 

 

 


 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

                

 

 

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