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अनियमितता का एक और पिटारा

सिंचाई विभागाध्यक्ष सागर चंद्र के खिलाफ अनियमितता का एक और पिटारा खुल गया है। नैनीताल के बलिया नाला की लाइनिंग योजना में उन पर गंभीर अनियमितता के आरोप हैं। शासन ने उनके खिलाफ प्रारंभिक जांच के आदेश दिए हैं। दो इंजीनियरों की कमेटी यह जांच करेगी।

आरोप है कि सन 1999-2001 नैनीताल में अधीक्षण अभियंता के पद पर रहते हुए सागर चंद्र ने नैनीताल के बलिया नाला लाइनिंग योजना में भारी अनियमितता की थी। 1999 में 19 करोड़ की योजना को 2001 में 21 करोड़ की बना दी। शासन स्तर पर मुख्य अभियंता कार्यालय से प्रकरण से संबंधित अभिलेख तथा पत्रावलियां मंगाकर अध्ययन किया गया तो कई तरह की अनियमितताएं सामने आई हैं। सन 1999 के प्राक्कलन में नदी तल से कार्य स्थल तक की ढुलाई दो किमी बताई गई। 2001 के प्राक्कलन में इसे पांच किमी कर दिया गया। इस तरह एक ही परियोजना की ढुलाई दो साल में ढाई गुना बढ़ गई। हल्द्वानी से कार्य स्थल तक सीमेंट ढुलाई का 1999 में प्राक्कलन 24 किमी दर्शाया गया, जबकि यह 2001 में यह 25 किमी हो गया। सीमेंट की ढुलाई की दर को नगरपालिका में दिखाते हुए 15 प्रतिशत बढ़ा दिया गया।

इसी तरह रेत, बजरी तथा बोल्डर की ढुलाई औसत दूरी हल्द्वानी से कार्यस्थल तक 1999 के प्राक्कलन में 24 किमी ली गई थी पर 2001 में यह 30 किमी हो गई। कार्य स्थल तक खच्चरों से सीमेंट, पत्थर, बजरी आदि की ढुलाई 1999 के प्राक्कलन में तीन किमी ली गई, लेकिन 2001 में यह बढ़ाकर सात किमी कर दी गई। 1999 के प्राक्कलन में पानी डायवर्ट करने के लिए सौ एमएम डाया प्लास्टिक पाइपों का प्रावधान किया गया और 2001 में 150 एमएम डाया स्टील पाइपों का प्रावधान कर दिया गया, जबकि यह पाइप अस्थाई तौर पर लगाए जाने थे। इसके लिए मोटे स्टील पाइप लगाना बेवजह खर्चीली व्यवस्था थी।

यहां तक कि सेंट्रल वाटर कमीशन की अनुमति लिए बिना बलिया नाले में सीडब्लूसी की दरों का प्रावधान कर दिया गया जिससे मजदूरी में स्वत: 35 प्रतिशत बढ़ोतरी हो जाती है। इस तरह सरकार को आर्थिक क्षति पहुंचाने के लिए भरपूर प्रयास किए गए। शासन ने इस संबंध में प्रारंभिक जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। शासन ने प्रारंभिक जांच इंजीनियरों की दो सदस्यीय कमेटी को सौंपी है। इसमें चीफ इंजीनियर उत्तर हल्द्वानी आनंद बल्लभ पाठक और प्रभारी चीफ इंजीनियर रुड़की सुरेश चंद्र शर्मा शामिल हैं।

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