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देना पड़ सकता है गुजरा भत्ता

बबिता के पिता महेन्द्र, बचपन में ही उसे और उसकी मां को छोड़ कर कहीं चले गए। बबिता की मां ने पति के बहुत इंतजर के बाद दूसरी शादी कर ली। दूसरे पिता ने बबिता की परवरिश की। अब वह 21 साल की हो गई है। उसकी मां को उसकी चिंता है। इधर बबिता के वास्तविक पिता महेन्द्र के बारे में भी उन्हें पता चल गया। वे आर्थिक रूप से समृद्ध हैं और दूसरी शादी कर परिवार बसा चुके हैं। बबिता की मां अपनी बेटी की शादी के लिए आर्थिक सहायता और बेटी का अधिकार चाहिए। यह मामला शनिवार को भोंडसी स्थित नवज्योति इंडिया फाउंडेशन के परिवार परामर्श केन्द्र में उठा।


समाज कल्याण बोर्ड के सौजन्य से चल रहे परामर्श के केन्द्र की सब कमिटी के विशेषज्ञों ने बबिता के वास्तविक पिता महेन्द्र को बेटी की जिम्मेदारियां संभालने का आदेश दिया। इसी तरह सीमा (बदला हुआ नाम) के परिवार वालों को उसकी शादी के पांच साल बाद अंदाज हुआ कि उसके पति को संतान नहीं हो सकती। सीमा तलाक चाहती है। विशेषज्ञों ने डॉक्टरों की रिपोर्ट के आधार पर उसे न्यायालय तलाक के आवेदन की सलाह दी। 

बैठक में सीनियर एडवोकेट आशा बरक, एडवोकेट मुकेश शर्मा, सामाजिक कार्यकर्ता मीना बलदेव, संस्था की हेड ऑपरेशंस उजला बेदी, काउंसलर प्रतिभा और हरियाहेड़ा गांव के सरपंच न्याज मुहम्मद ने हिस्सा लिया।
आशा बरक ने बताया कि सीआरपीसी की धारा 125 के अनुसार बेटी को भी पिता से गुजरा भत्ता लेने का अधिकार है। इसी के तहत बबिता को उसका अधिकार दिलाया जएगा। पति के संतान प्राप्ति में अक्षम होने की स्थिति में पत्नी तलाक की मांग कर सकती है। इसके  अलावा दहेज प्रताड़ना और पड़ोसी द्वारा प्रताड़ना के मामले पर विचार विमर्श किया गया। इस मौके पर अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए कानूनी प्रावधानों और वक्फ बोर्ड की संपत्ति को लेकर भी विशेषज्ञों ने चर्चा की।

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