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प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में 20 प्रतिशत डाक्टरों की कमी है

ग्रामीण क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं का ढाँचा मजबूत करने के लिए विभाग ने नया खाका तैयार किया है। इसके तहत पीएचसी (प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र) पर आयुषविधा के डॉक्टरों की तैनाती की जाएगी। आयुष के अंतर्गत होम्योपैथ, आयुर्वेद व यूनानी पद्धति के डॉक्टर आते हैं। पीएचसी पर सामान्य मरीज देखे जाएँगे और पेचीदा मामले सीएचसी (सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र) को रिफर किए जाएँगे जहाँ पर विशेषज्ञों की तैनाती होगी। यहाँ इमजरेंसी सेवाओं को और सुदृढ़ किया जाएगा और बड़े ऑपरेशन भी होंगे।

सीएचसी पर एक साथ डॉक्टरों के आवास बनाए जाने की तैयारी है जहाँ पर्याप्त सुरक्षा भी रहेगी। दरअसल, शासन की कई कोशिशों के बावजूद पीएचसी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाएँ चल नहीं पा रही हैं। विभाग में डॉक्टरों के करीब 60 प्रतिशत पद रिक्त हैं। जो डॉक्टर हैं भी उनके पीएचसी पर न ठहरने की वजह से गाँवों में हालात बदतर हो रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने अपनी रिपोर्ट में माना है कि पीएचसी पर मानक के अनुसार 20 प्रतिशत डॉक्टर भी नहीं हैं।

इसे देखते हुए अब नया खाका तैयार किया गया है। पीएचसी पर आयुष डॉक्टरों को तैनात किया जएगा। विभाग का मानना है कि आयुष डॉक्टरों को ग्रामीण इलाकों में इलाज का बेहतर अनुभव भी रहता है। नई योजना के तहत पीएचसी पर सामान्य मरीजों का उपचार होगा और सीएचसी पर गंभीर मरीज रिफर किए जएँगे। राज्य में इस समय तीन हजर के करीब पीएचसी व चार सौ के आसपास सीएचसी क्रियाशील हैं। स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. आईएस श्रीवास्तव का कहना है कि पीएचसी पर आयुष डॉक्टरों की तैनाती कर सीएचसी पर विशेषज्ञ व अन्य संसाधन बढ़ाए जाएँगे।

डॉक्टरों को सीएचसी पर खानसामा, फर्नीचर, फोन व सुरक्षा के साथ सरकारी आवास मिलेंगे। वह एक अटैची में सामान लेकर आएँगे तो भी आराम से रह सकते हैं। महानिदेशक ने कहा कि कोशिश होगी कि गंभीर मामले सीएचसी पर ही देख लिए जाएँ। जो मरीज सीएचसी पर नहीं देखे जा सकेंगे उन्हें जिला अस्पताल भेज जाएगा। इससे अस्पतालों में रेफरल यूनिट की एक चेन बन जाएगी जिससे इलाज आसान हो जाएगा। महानिदेशक ने बताया कि नई योजना पर काफी हद तक अमल हो चुका है और इसे बस सरकार की हरी झण्डी मिलना बाकी है।

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  • Web Title:पीएचसी पर तैनात होंगे आयुषविधा के डॉक्टर