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संपूर्ण क्रांति दिवस

संपूर्ण क्रांति की बात करने वाले लोकनायक जयप्रकाश नारायण राजनीति नहीं लोकनीति चाहते थे। उन्होंने विकसित समृद्ध भारत का सपना देखा था। जन-जन को स्वतंत्रता और विकास का लाभ मिले, इसी प्रयास में उन्होंने अपना जीवन लगा दिया। यह विचार वक्ताओं ने संपूर्ण क्रांति दिवस के अवसर पर आयोजित संगोष्ठी में व्यक्त किए। लोकनायक जयप्रकाश अंतरराष्ट्रीय अध्ययन विकास केन्द्र द्वारा शनिवार को आईआईएल सभागार में इस राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया।


संगोष्ठी के मुख्यवक्ता के रूप में पूर्व केन्द्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद उपस्थित रहे। संगोष्ठी का विषय ‘राजनीति में लोकनीति: दशा और दिशा’ रखा गया था। प्रसाद ने कहा कि रानजीति पर जब तक लोकनीति हावी नहीं होगी तब तक वह जन कल्याण का माध्यम नहीं बन सकती। समाजवादी चिंतक सुरेन्द्र मोहन ने केन्द्र और राज्य के संबंधों की चर्चा करते हुए राज्य को सशक्त बनाने पर बल दिया। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री राम सुंदर दास ने जनता को जगाने की जरूरत बताई। संस्था के महासचिव अभय सिन्हा ने कहा कि देश की राजधानी में लोकनायक जयप्रकाश का राष्ट्रीय स्मारक बनना चाहिए। एक शोध संस्थान भी स्थापित किया जाना चाहिए। संगोष्ठी में जयप्रकाश पर केन्द्रित पत्रिका जयप्रभा का विमोचन किया गया। कवि डा. शिव नारायण को बिहार गौरव सम्मान से भी नवाजा गया। कार्यक्रम के शुभारंभ में साहित्य कला परिषद के कलाकारों ने वंदेमातरम् गीत प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व केन्द्रीय मंत्री ब्रज किशोर त्रिपाठी ने की। उन्होंने कहा कि संपूर्ण क्रांति के जरिए ही राजनीति में लोकनीति का सपना सच हो सकता है। संचालन डा. नमिता राकेश ने किया। दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश राजेन्द्र सच्चर, मृदुला सिन्हा, साहित्यकार गिरधर राठी सहित अच्छी संख्या में लेखक, बुद्धिजीवी, समाज सेवी आदि संगोष्ठी में उपस्थित रहे। धन्यवाद ज्ञापन संस्था के कार्यकारिणी सदस्य जितेन्द्र नारायण सिंह ने किया।

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