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उम्मीदवारी तय करने में बेलने पड़ते हैं पापड़

झारखंड में राज्यसभा का चुनाव हमेशा उलझन पैदा करनेवाला बन जाता है। चुनाव एक सीट पर हो या दो, राजनीतिक दल बगैर उधेड़बुन में फंसे कोई फैसला नहीं ले पाते हैं। विधानसभा में पलड़ा किसी का भारी हो, उम्मीदवारी तय करने में उन तो दलों को भी पापड़ बेलने ही पड़ते हैं। अभी दो सीट पर चुनाव होना है।विधानसभा का अंतगणित सदन में यूपीए के पक्ष में है। लेकिन कोई दल सर्वसम्मति से एक उम्मीदवार तय नहीं कर पाया है।

नामांकन के लिए चार दिन बीत चुके हैं और अब सिर्फ तीन दिन (8, 9 और 10 जून) रह गये हैं। आज तक एक भी नामांकन नहीं हो पाया है। हो भी कैसे, जब उम्मीदवारी ही तय नहीं हो पायेगी। दरअसल दलों के अंदर इतने विरोधाभास और व्यक्तिगत लिप्सा व्याप्त है कि कोई दल या नेता किसी दूसरे पर विश्वास ही नहीं कर पाता है। पिछले राज्यसभा चुनाव के दौरान एनडीए और यूपीए दोनों को भारी फजीहत का सामना करना पड़ा। यही कारण था कि एनडीए को एक श्योर शॉट सीट होने के बावजूद पूरे खेमें में अंदर ही अंदर शंका और संशय व्याप्त था।

केंद्र से भाजपा ने केंद्रीय पर्यवेक्षक के रूप में विजय गोयल भेजे गये थे। यूपीए खेमे में क्या हुआ था, यह किसी से छिपा नहीं है। शिबू सोरेन के 17 विधायक तीन खेमें में बंट गये थे। कांग्रेस और राजद का भी यही हाल था। सबके वोट बंट चुके थे। राजद की ओर से नामांकन भरनेवाले प्रदेश अध्यक्ष गौतम सागर राणा को दस प्रस्तावक तक नहीं मिले थे।

इस बार भी कुछ ऐसा ही परिदृश्य दिखायी दे रहा है। यूपीए को दोनों सीटें मिल सकती है। लेकिन यूपीए की ओर कौन होगा उम्मीदवार यह किसी खेमे से अब तक संकेत नहीं मिला है। झमुमो, कांग्रेस और राजद के अलावा निर्दलीय विधायक भी बड़े फैक्टर साबित होंगे।

एनडीए खेमे में भी उलझन ही उलझन है। एक तो स्पष्ट बहुमत नहीं होने की वजह से एक भी सीट मिलना संभव नहीं है, वहीं जदयू के साथ रिश्तों में खटास दूसरी वजह है। कुल मिलाकर राज्यसभा चुनाव का राजनीतिक खेल दिलचस्प होगा, यह तय है।

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  • Web Title:रास चुनावः उधेड़बुन में हैं राजनीतिक दल