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कभी खुद की सुरक्षा में थीं अक्षम, अब दूसरों की कर रहीं सुरक्षा

महानगरों में ट्रैफिकिंग की शिकार महिलाओं ने अब राज्य के दो दजर्न से अधिक कारखानों की सुरक्षा की कमान अपने हाथों में ले ली है। ये लड़कियां कभी खुद की सुरक्षा करने में अक्षम थीं, लेकिन आज दूसरों की सुरक्षा बखूबी कर रही हैं। कारखाने के भीतर जाने-आनेवालों से उनका नाम और पता पूछती हैं। इनके चेहरे अब बुङो-बुङो से नहीं, बल्कि खिलखिलाते नजर आ रहे हैं।

ट्रैफिकिंग की शिकार लड़कियों को उनका मुकाम दिलाने में भारतीय किसान संघ के निदेशक संजय कुमार मिश्र ने महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है। मिश्र के अथक प्रयास से ही आज इस प्रकार की 30 लड़कियों को मुकाम मिला है। कल तक इन लड़कियों के माता-पिता भी इन्हें तिरस्कृत नजरों से देखते थे, लेकिन आज उन्हें गले लगाने से नहीं हिचक रहे हैं।

भारतीय किसान संघ ने बुढ़मू के घने जंगलों में 30 लड़कियों को सिक्यूरिटी का प्रशिक्षण देकर उन्हें राज्य के विभिन्न शहरों में पदस्थापित कराया है। इन्हें खेल-कूद से लेकर बंदूक चलाने तक की ट्रेनिंग दी गयी है। ट्रैफिकिंग की शिकार और परित्यक्त पावर्ती कुजूर ने बताया कि कल तक वह अपनी जिंदगी से उदास थीं। किसी से लड़ने की शक्ति नहीं थी, लेकिन आज वह अपने हक और अधिकार के लिए किसी से भिड़ सकती हैं। आज वह पूरी तरह से अपने पैरों पर खड़ी हैं। उसके माता-पिता भी उसे अपनाने को तैयार हैं।

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  • Web Title:ट्रैफिकिंग की शिकार महिलाएं संभाल रही हैं कारखानों की सुरक्षा