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राष्ट्रमंडल खेल को सफल और यादगार बनाएंगे

उनकी दूसरी पारी में ज्यादा चमक-दमक है। पिछली बार के मुकाबले मनोहर सिंह गिल ने इस बार अपने पुराने पोर्टफोलियो को तरक्की के साथ हासिल किया है। इस बार वे खेल व युवा विभाग के कैबिनेट स्तर के मंत्री हैं। तमाम कामों के अलावा उनके जिम्मे सबसे बड़ा काम है राजधानी दिल्ली में अगले राष्ट्रमंडल खेलों का आयोजन। मुख्य निर्वाचन आयुक्त के तौर पर देश में आम चुनाव कराने के अनुभव तो उनके पास है ही, फिर भी खेलों के इस विराट आयोजन को भी वे चुनौती के तौर पर ले रहे हैं। पुराने मंत्रालय में नई शुरूआत कर रहे डॉ गिल से रू-ब-रू हुए उमाकांत लखेड़ा -

कॉमनवेल्थ खेल में सवा साल बाकी बचा है, क्या तैयारियां हैं?
दिल्ली में नये खेल गांव के अलावा दिल्ली के नेहरू स्टेडियम, नेशनल स्टेडियम, कर्णी सिंह शूटिंग रेंज, साइकिलंग, वेलोड्रोम, तालकटोरा स्वीमिंग पूल कॉम्प्लेक्स, टेनिस स्टेडियम के लिए सब तैयारियां पूरी हैं। डिज़ाइन को लेकर जो समस्याएं थीं सब दूर कर ली गयी हैं। कार्यो की प्रगति को मैं स्वयं मौके पर जकर देख रहा हूं। बाधाओं को दिल्ली सरकार के सहयोग से तत्काल सुलझया ज रहा है। हम इस विराट खेल आयोजन को सफल और यादगार बनाएंगे। निर्माण और तैयारियों के लिए फंड की कहीं कोई कमी नहीं है। हाल ही में केंद्रीय कैबिनेट की पहली बैठक में ही स्पोर्ट्स अथॅारिटी के पांच स्टेडियमों की कायापलट के लिए 2460 करोड़ रुपए स्वीकृत किए हैं। हम यह भी निगरानी कर रहे हैं कि धन का सही उपयोग हो।

खिलाड़ियों के प्रशिक्षण में क्या प्रगति है?
देश की जनता की अपेक्षा होगी कि ज्यादा से ज्यादा मेडल हमारे खिलाड़ी ही जीतें। हमने दो साल पहले से ही इस दिशा में ठोस तैयारी शुरू कर दी थी। राष्ट्रीय खेल फेडरेशनों समेत संबंधित संस्थाओं के साथ बैठकर पृूरा ब्लूप्रिंट बना। 1300 बेहतरीन खिलाड़ी 13 क्षेत्रों के लिए चुने गये। 250 विदेशी तथा भारतीय खेल प्रशिक्षकों को लगाया गया है। फिजियोथेरेपिस्ट से लेकर फिजियोलॉजिस्ट तक हर तरह के विशेषज्ञ जोड़े गये हैं। इस पूरी प्रक्रिया के लिए 678 करोड़ रुपए का प्रावधान रखा गया है।

प्रशिक्षण कहां-कहां हो रहे हैं?
खिलाड़ियों को देश-विदेश दोनों जगह प्रशिक्षित किया ज रहा है। उन्हें स्टेट अॅाफ आर्ट इक्िवपमेंट्स के साथ कड़ी प्रशिक्षण प्रक्रिया से पारंगत बनाया ज रहा है ताकि कॉमनवेल्थ गेम्स के अंतिम चयन तक पूरी प्रतिस्पर्धा बनायी रखी ज सके। हालांकि तीरंदाजी, एथलेटिक्स, बैडमिंटन, बॉक्िसंग, हॉकी, शूटिंग, स्कवॉश, स्विमिंग, टेबल टेनिस, टेनिस, वेट लिफ्टिंग व कुश्ती में चयन प्रक्रिया पहले ही पूरी हो चुकी है।

आयोजन में युवा वर्ग व छात्रों की अधिकाधिक भूमिका को कैसे सुनिश्चित किया जा रहा है?
देश भर के 35000 युवकों को स्वयंसेवकों के रूप में खेल आयोजन से जोड़ा ज रहा है। एनसीसी, एनएसएस, नेहरू युवक केंद्र समेत विश्वविद्यालयों के छात्र-छात्राएं शामिल किये ज रहे हैं।

कॉमनवेल्थ गेम में डोप टेस्टिंग की दिशा में क्या व्यवस्था की गयी है?
सितंबर 2008 में हमारी डोप टेस्टिंग लेबॉरेटरी को अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिल चुकी है। बीजिंग ओलंपिक के मौके पर मैंने खुद इसके लिए जोर लगाया था। पुणो में युवा कॉमनवेल्थ गेम में इस लेबॉरेटरी के परिणाम बहुत सफल रहे। इस मामले में हम इतने आगे बढ़ चुके हैं कि  आज स्वीडन जसे अग्रणी देश भी डोप टेस्टिंग के लिए अपने सैंपल भारत भेज रहे हैं।

आयोजन में सुरक्षा एक अहम मुद्दा है, पुख्ता सुरक्षा के लिए क्या इंतजम हैं?
गृह मंत्रालय और दिल्ली के  लेफ्टिनेंट गवर्नर इस दिशा में सभी तरह की तैयारियों में जुटे हैं। खेल परिसरों के चप्पे-चप्पे पर कैसे सुरक्षा होनी है। कहां-कहां कैमरे लगने हैं। खिलाड़ियों के आने-जने, और उनके होटलों की सुरक्षा किस तरह से फुल प्रूफ रखी जयेगी, इसके लिए सभी इंतजम प्रगति पर हैं। दिल्ली पुलिस में नयी भर्तियां व ट्रेनिंग कैसे होगी, इन सारे मुद्दों पर नजर है और हम गृह मंत्रालय के साथ हर स्तर पर समन्वय बिठा रहे हैं।

एडवेंचर खेलों को बढ़ावा देने के लिए क्या प्राथमिकताएं हैं?
मैं स्वयं बचपन से लेकर सिविल सेवा के अपने पूरे कैरियर में जुड़ा रहा हूं। एक तो हमने एडवेंचर खेलों की अवॉर्ड प्रक्रिया की समीक्षा की है दूसरा एडवेंचर खेलों के लिए पहली बार माउंटेन एडवेंचर कैंप लगवाए हैं जिनका आयोजन भारतीय माउंटनेयरिंग फाउंडेशन ने किया है।

क्रिकेट के मुकाबले दूसरे खेलों की उपेक्षा दूर करने के लिए क्या करेंगे?
इसका असली कारण है कि खिलाड़ियों की आर्थिक व सामाजिक सुरक्षा बहुत कमजोर होना। पी. टी. उषा जसी अंतरराष्ट्रीय मेडल विजेता को मात्र 4000 रुपये पेंशन मिलती थी, उसे जुलाई 2007 से दोगुना कर दिया। मैं तो चाहता हूं कि दुनिया में देश का नाम रोशन करने वाले खिलाड़ियों को 25 हजर रुपये पेंशन मिले। अवार्डमनी को भी 80-90 गुणा बढ़ाया गया है। इसके लिए जोर लगाऊंगा।

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