class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

गरजते सदन में सुरीली आवाज

गरजते सदन में सुरीली आवाज

मीरा कुमार को गुस्सा नहीं आता है। गुस्से में भी वे नहीं चीखती हैं। सौम्य हैं। हंसमुख हैं। पढ़ाकू भी हैं। संसद को पहली बार दर्शक दीर्घा से देखने वाली मीरा कुमार अब संसद की हेडमास्टर की भूमिका में दिखेंगी। अपने स्वभाव के विपरीत चीखते-चिल्लाते सांसदों को प्यार-दुलार और डांट-फटकार भी अब उन्हें लगानी होगी।

संसद के स्पीकर पद पर पहुंचने वाली वे पहली महिला हो गई हैं। वह भी दलित।  इक्कीसवीं सदी में दुनिया के 187 मौजूदा लोकतांत्रिक देशों में से केवल 32 देशों में ही महिलाएं इस पद तक पहुंचने में सफल हुई हैं । आस्ट्रिया दुनिया का पहला देश है, जहां किसी महिला को संसद का स्पीकर चुना गया। द्वितीय विश्वयुद्ध से पहले आस्ट्रियाई संसद बंदुेस्रात में पहली बार महिला स्पीकर पद पर आसीन हुई थी।

आजदी के बासठ साल बाद दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में अब यह मौका आया है। इस पद पर चुने जने के बाद चौसठ वर्षीय मीरा कुमार ने कहा कि एक महिला के लिए यह ऐतिहासिक घड़ी है कि उसे इस महत्वपूर्ण और पवित्र पद का पात्र समझ गया। डिप्लोमेट से राजनीतिक बनीं मीरा कुमार पूर्व उपप्रधानमंत्री दिवंगत जगजीवन राम की बेटी हैं। उन्होंने 1985 में भारतीय विदेश सेवा की नौकरी छोड़कर राजनीति में कदम रखा। 

पीवी नरसिंह राव सरकार में वह उपमंत्री के रूप में शामिल हुईं और 2004 में यूपीए के सत्ता में आने पर बिहार के सासाराम से निर्वाचित मीरा कुमार को कैबिनेट मंत्री बनाया गया। इस बार भी उन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किया गया था, लेकिन जल संसाधन विकास मंत्रालय की जिम्मेदारी संभालने के दो दिन बाद ही उन्हें लोकसभा अध्यक्ष बनाने का कांग्रेस आलाकमान ने फैसला किया जिसके बाद उन्होंने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया।

मीरा कुमार भले ही बिहार का प्रतिनिधित्व करती हों, लेकिन उन्होंनें अपनी राजनीतिक पारी उत्तर प्रदेश से शुरू की थी और यहीं से जीतकर पहली बार लोकसभा में पहुंची थीं। लोकसभा का उपचुनाव इन्होंने1985 में उत्तर प्रदेश की बिजनौर सीट से लड़ा था और उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती तथा लोकजनशक्ित पार्टी के अध्यक्ष राम विलास पासवान को शिकस्त दी थी। यह संयोग ही कहा जाएगा कि बिहार सरकार की पहली महिला कैबिनेट मंत्री की पुत्रवधु मीरा कुमार ने पहली महिला लोकसभा अध्यक्ष बनने का गौरव प्राप्त किया है। 

31 मार्च 1945 को जन्मी मीरा कुमार की प्रारंभिक शिक्षा दिल्ली के महारानी गायत्री देवी स्कूल में हुई। उन्होंने 1968 में दिल्ली विश्वविद्यालय से अंग्रेजी में स्नातकोत्तर की डिग्री ली। वर्ष 1971 में वह विदेश सेवा में गईं। मीरा कुमार पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के प्रयास से 1990 में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव बनीं। वह 1996 में दिल्ली के करोलबाग से सांसद चुनी गईं।

मीरा कुमार बिहार से पहली बार 2004 के लोकसभा चुनाव में सासाराम सीट से कांग्रेस के टिकट पर सांसद चुनी गईं। इसके बाद इसी क्षेत्र से पुन: कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीत कर सांसद बनी हैं। इस सीट से उनके पिता बाबू जगजीवन राम 1952 से लेकर 1984 तक लोकसभा चुनावों में विजयी रहे थे। निजी बातों को साझ करते हुये मीरा कुमार कहती हैं कि मुङो गुस्सा आता है, लेकिन मैं चिल्लाती नहीं हूं।

मैं हमेशा कुछ न कुछ पढ़ती रहती हूं और मेरी प्रिय पुस्तक महाकवि कालिदास की अभिज्ञान शांकुतलम् है। पहली बार इस सदन की सदस्य बनने पर मैं पीछे की बेंच पर बैठा करती थी। उन्होंने कहा कि जब वह स्कूल की छात्रा थी, तब कई बार दर्शक दीर्घा से उन्होंने लोकसभा की कार्यवाही देखी। उस समय स्वतंत्रता संग्राम के पुरोधा इस सदन में बैठकर देश के लोगों के हित में फैसले लेते थे। खासकर दलितों, वंचितों और कमजोर तथा हाशिए पर खड़े लोगों के लिए वह बड़ी मशक्कत करते थे।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:गरजते सदन में सुरीली आवाज