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पटना के वाटर सप्लाई समेत सूबे की 758 करोड़ रुपए की परियोजनाओं पर काम शुरू

राज्य सरकार की तंद्रा अब टूट रही है। जन-निजी भागीदारी (पीपीपी) आधारित सूबे की परियोजनाओं में केन्द्र की निर्माण एजेंसियों को वर्चस्व खत्म करने का काम नगर विकास विभाग से शुरू हो रहा है। विभाग ने अब नवगठित बिहार अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (बीयूआईडीसी) की मार्फत अपनी परियोजनाओं का निर्माण करने का निर्णय किया है। पटना में करीब 400 करोड़ की वाटर सप्लाई मेगा प्रोजेक्ट के साथ ही पूरे सूबे की 758 करोड़ रुपए की परियोजनाओं का संचालन अब बीयूआईडीसी के माध्यम से होगा।

बीयूआईडीसी ने इसके लिए सुपरविजन और डिजाइन कंसल्टेन्ट नियुक्त करने की कार्रवाई शुरू कर दी है। कंसल्टेन्टों का पैनल बनाया जा रहा है जो अब नगर विकास विभाग की परियोजनाओं का संचालन करेगा। ये ही टेंडर करेंगी और निर्माण एजेंसियां का चयन कर परियोजना को सफलतापूर्वक जमीन पर उतारेंगे।दरअसल केन्द्रीय एजेंसियों की मनमानी से नगर विकास विभाग अब परेशान हो गया हैं। पटना में कंकड़बाग ड्रेनेज प्रोजेक्ट का निर्माण कर रही एनबीसीसी का रवया जगजाहिर है।

नगर विकास, पथ निर्माण, परिवहन विभाग समेत कई विभागों में केन्द्रीय एजेंसियां ने सिक्का जमा रखा है। एक तो इन एजेंसियों का सुपरविजन और डिजायनिंग कंसल्टेंसी कॉस्ट ज्यादा होता है और दूसरी तरफ वे यहीं के ठेकेदारों के सहारे काम करवाने का प्रयास करती हैं। विभागीय सूत्रों के मुताबिक पटना के 400 करोड़ रुपए के सिर्फ वाटर सप्लाई प्रोजेक्ट के डीपीआर निर्माण के एवज में राज्य सरकार से एजेंसी ने 1.75 करोड़ रुपए वसुला है।

वहीं बुद्धा स्मृति पार्क के निर्माण में लगी एजेंसी और ठोस अवशिष्ट प्रबंधन (एसडब्ल्यूएम) के डीपीआर का निर्माण करने वाली एजेंसी ने भी भारी रकम वसूला है। इसके पहले पटना का सिटी डेवलपमेंट प्लान बनाने वाली एजेंसी आधा-अधूरा काम कर करीब एक करोड़ की राशि गड़प चुकी है। कंकड़बाग में ड्रेनेज बना रही एजेंसी को तो राज्य के मंत्री कई बार चेतावनी दे चुके हैं।

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  • Web Title:केन्द्रीय निर्माण एजेंसियों के वर्चस्व को खत्म करने की तैयारी