class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

प्रीमियर कॉलेज पीएमसीएच में भी भारी कमियां,10-11 जून को एमसीआई की एक्जीक्यूटिव कमेटी में पेश होगी जांच रिपोर्ट

मधेपुरा मेडिकल कॉलेज में भवन नहीं तो पावापुरी मेडिकल कॉलेज में किराये के भवन में छात्रों को पढ़ाने की तैयारी। बेतिया मेडिकल कॉलेज में भवन है तो परमानेन्ट शिक्षक नहीं। ये हैं नये खुलने वाले मेडिकल कॉलेजों की अद्यतन स्थिति। पुराने कॉलेजों में हर जगह शिक्षकों की कमी है। यह स्थिति तब है जबकि पिछले दो-तीन एमसीआई निरीक्षणों में शिक्षकों के पद भरे जाने की लगातार हिदायत दी जाती रही है।

राज्य सरकार के प्रीमियर कॉलेज पटना मेडिकल कॉलेज में भी शिक्षकों की करीब 20 फीसदी कमी। खास्ताहाल लाइब्रेरी। गंदे ऑपरेशन थियेटर। समय पर मशीनों का मेनटेंस नहीं। हॉस्टल वर्षो से निर्माणाधीन। नन क्लीनिकल विभागों की स्थिति ठीक नहीं। पेशेन्ट बहुत पर उनके प्रॉपर केयर नदारद। ऐसे में कैसे बढ़ेंगी पटना मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की सीटें। करीब यही हालात दरभंगा, भागलपुर और पटना स्थित नालन्दा मेडिकल कॉलेज के भी है। सप्ताह भर के बिहार दौरे के बाद एमसीआई की जांच टीमों ने मेडिकल कॉलेज की अद्यतन रिपोर्ट बना ली है।

10-11 जून के बीच दिल्ली में एमसीआई की एक्जीक्यूटिव कमेटी की बैठक में रिपोर्ट पेश कर उसे केन्द्र सरकार के समक्ष उपस्थित किया जाएगा। एमसीआई की रिपोर्ट के आधार पर ही चारों पुराने कॉलेजों में सीटें बढ़ाने और तीन नये मेडिकल कॉलेजों में पढ़ाई शुरू करने का रास्ता साफ होगा। हालांकि दो पुराने कॉलेज मुजफ्फरपुर और गया मेडिकल कॉलेजों मे एमसीआई निरीक्षण नहीं होने से सीटें बढ़ने का मामला पहले ही समाप्त हो गया है।

आईजीआईएमएस में शिक्षकों की बहाली नहीं होने से इस वर्ष पढ़ाई शुरू होने की संभावना नहीं है। एमसीआई के एक मेम्बर की मानें तो इस बार राज्य सरकार गंभीर है। एमसीआई और राज्य सरकार के बीच का तनाव काफी हद तक दूर हो चुका है। इतनी कमियों के बावजूद पटना मेडिकल कॉलेज में 50, दरभंगा मेडिकल कॉलेज में 60, भागलपुर मेडिकल कॉलेज में 50 और नालन्दा मेडिकल कॉलेज में 50 सीटें बढ़ने की अब भी उम्मीद की जा रही है।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:सातों मेडिकल कॉलेज का एमसीआई निरीक्षण पूरा