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एनसीएम को शक्तियां देने पर विचार: अल्पसंख्यक मंत्रालय

सलमान खुर्शीद की अगुवाई वाला अल्पसंख्यक मामलों का मंत्रालय राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग (एनसीएम) को और शक्तियां प्रदान करने पर विचार कर रहा है। यह अब तक महज अनुशंसात्मक निकाय है।यह पूछे जाने पर कि क्या मंत्रालय एनसीएम को अतिरिक्त शक्तियां प्रदान करेगा तो उन्होंने कहा, ‘यह निश्चित तौर पर कुछ ऐसा है जिसकी बड़ी शिददत से वे जरूरत महसूस कर रहे हैं। हम निश्चित तौर पर इस पर गंभीरता से विचार करेंगे।’ गौरतलब है कि अन्य आयोगों को किसी मामले में सम्मन जारी करने जैसे अधिकार हैं।

खुर्शीद अगले हफ्ते एनसीएम अध्यक्ष मोहम्मद शफी कुरैशी और अन्य सदस्यों के साथ विस्तत चर्चा करेंगे। उम्मीद की जाती है कि आयोग इस दौरान सभी लंबित मुद्दों का उठाएगा। इसमें आयोग को संवैधानिक दर्जा देने की मांग भी शामिल है। एनसीएम ने दो साल पहले मंत्रालय को इस संबंध में एक मसौदा सौंपा था। तब ए.आर. अंतुले अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री थे। कुरैशी ने कहा, ‘हमने पिछली सरकार को एनसीएम को संवैधानिक दर्जा देने तथा उसे और शक्तियां देने की मांग करते हुए मसौदा रिपोर्ट सौंपी थी। इसमें सम्मन जारी करने का अधिकार भी शामिल था।’ उन्होंने कहा, ‘सरकार ने इस संबंध में एक विधेयक को संसद में रखा जिसे बाद में एक उच्चाधिकार समिति को सौंप दिया गया। उसने भी इसे हरी झंडी दे दी।

इस बीच, सरकार का कार्यकाल खत्म हो गया। हमें उम्मीद है कि नयी सरकार इस मुददे का निपटारा करेगी।’ कुरैशी ने कहा कि आयोग महसूस करता है कि अगर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति और राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की तर्ज पर उसे भी पक्षों को सम्मन जारी करने का अधिकार दिया जाता है तो वह शिकायतों को कारगर तरीके से निपटाने की स्थिति में होगा। उन्होंने कहा, ‘हम चाहते हैं कि हम आवेदक की सर्वश्रेष्ठ संतुष्टि तक अपना काम करने में सक्षम हों।

जो लोग यहां आएं उन्हें महसूस होना चाहिए कि उनकी समस्याओं को अंजाम तक ले जाया जाएगा।’ एनसीएम अधिकारियों ने दलील दी कि वे उस समय असहाय महसूस करते हैं जब उनकी टिप्पणियों और अनुशंसाओं की अधिकारी पूरी तरह अनदेखी करते हैं। इसी कारण से उड़ीसा में हुई सांप्रदायिक हिंसा के दौरान बार-बार पत्र भेजने के बावजूद राज्य सरकार ने उनकी सिफारिशों पर अमल नहीं किया। पिछले साल कर्नाटक और उड़ीसा में हुई हिंसा के दौरान आयोग को दोनों राज्यों की सरकारों से घटनाओं के बारे में उचित सूचना मिलने में भी काफी परेशानी हुई।

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