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ज्वालामुखी विस्फोट विलुप्त कर सकते हैं प्रजतियों को

ज्वालामुखी विस्फोट विलुप्त कर सकते हैं प्रजतियों को

एक नये अध्ययन से खुलासा हुआ है कि बार-बार होने वाले और बड़े ज्वालामुखी विस्फोट जलवायु परिवर्तन कर व्यापक पैमाने पर प्रजतियों की समाप्ति का कारण बन सकते हैं।

कर्टिन विश्वविद्यालय के नेतत्व में अंतरराष्ट्रीय दल ने खुलासा किया है कि प्राचीन काल में भारी ज्वालामुखी विस्फोट के कारण इतनी तेजी से ग्रीन हाउस गैस मुक्त हुई कि उनसे तेजी से जलवायु परिवर्तन हुआ और भारी संख्या में प्रजतियां विलुप्त हो गयी।

अंतरराष्ट्रीय दल के प्रमुख फ्रेड जोर्डन ने बताया, हमारे पास ज्वालामुखीय चटटानों के सावधानी से तिथि अंकित खनिज हैं और उनसे पता चलता है कि केवल तेजी से ज्वालामुखीय विस्फोट के कारण उल्लेखनीय तौर पर प्रजतियां विलुप्त हो गयीं।

उन्होंने बताया, वायुमंडल में ग्रीनहाउस गैसों के मुक्त होने से दीर्घकालिक जलवायु और जव वत्रानिक प्रभावों को समक्षने के लिए आधुनिक समाज को यह समक्षना होगा कि अतीत में जलवायु किस प्रकार प्रभावित हुई।

पचपन करोड़ वर्ष पहले भारी पैमाने पर प्रजतियों के विलुप्त होने को लेकर कई वषरें से विवाद रहा है। विवाद विशालकाय क्षुद्रग्रहों या भारी ज्वालामुखी विस्फोट के कारण प्रजतियों की विलुप्तता को लेकर है।

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