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रीचार्ज करके ही भूजल स्तर बढ़ाया जा सकता है।

चंडीगढ-पंजाब में मल मूत्र का उपयोग करके अरबों रुपये की खाद व पानी की बचत की जा सकती है,यह बात आज वीरवार को यहां मीट दी प्रेस प्रोग्राम दौरान प्रसिद्ध पर्यावरण संरक्षक संत सींचेवाल ने कही। उनका कहना था कि कई वर्ष पहले खेतों में किसान अपनी खेती की उपज बढ़ाने के लिए जानवरों के मल मूत्र का अधिक उपयोग करते थे जो आज ना के बराबर हो गया है और अब विभिन्न तरह के रसायनिक खादें व दवाईयों का उपयोग किया जा रहा है। उनका यह कहना था कि शहरों के सीवरेज का पानी अब कृषि के लिए उपयोग में लाया जा सकता है जिससे काफी बचत होगी।

ज्ञात हो सींचेवाल पंजाब में उस काली बेई को गंदे पानी से साफ करने से चर्चा में आए थे जिसका सिखों के पहले गुरु श्री गुरु नानक देव जी से संबंध रहा है।

सींचेवाल ने कहा कि पंजाब के जिन क्षेत्रों व अन्य भी जिन स्थानों पर पानी का स्तर लगातार नीचे जा रहा है वहां पर पानी रीचार्ज करके ही भूजल का स्तर बढ़ाया जा सकता है। उनका कहना था कि नहरों व भूजल के दूषित होने के लिए केवल सरकार या केवल जनता को दोषी नहीं ठहराया जा सकता बल्कि इस में सरकार जहां पर्यावरण को बचाने के लिए बनाए गए कानूनों को सही ढंग से लागू न करवा सकने के लिए दोष ही वहीं जनता भी अपने वातावरण को दूषित करने के लिए बराबर की भागीदार है।

उनका कहना था कि जिस तरह से हमारी नहरें सीवर व उद्योगिक कचरे से दूषित हो रही हैं उसके चलते इस का प्रभाव अगले कई दशकों तक देखने को मिलेगा और इस के लिए हमारी अगली पीड़ियां हमे ही कोसेंगी। इस के अलावा गंदा पानी भूजल के साथ मिल कर भूमि के नीचे के पानी को भी दूषित कर रहा है। उनका कहना था कि पंजाब के वातावरण को बचाने के लिए गांव गांव में शिक्षा का प्रसार किया जाना जरूरी है क्यों कि अगर शिक्षा सही ढंग से नहीं दी जाएगी तो हमारे भविष्य के नागरिक पर्यावरण को कैसे बचा पाएंगे।

उनका कहना था कि जो पंजाब के लोग सभी को पानी पिलाना और लंगर खिलाना अपना धर्म समझतों है वहीं अब राजस्थान व पंजाब के कई जिलों को सीवर का पानी पीने पर मजबूर कर रहे हैं। उनका कहना था कि राजस्थान के अस्पतालों में कैंसर का इलाज करवाने के लिए जो मरीज जाते हैं उसमें से 25 प्रतिशत पंजाब के व बाकी राजस्थान के होते हैं। उनका कहना था कि इस मामले में पंजाब की पंजाब राज्य प्रदूषण बोर्ड भी उन लोगों के खिलाफ कुछ नहीं कर पाया जो राज्य के पानी व भूजल को दूषित कर रहे हैं। उनका कहना था कि इस में सरकार व प्रदूषण फैला रहे दोनों की ही मिली भुगत है।

उनका कहना था कि उन्होंने अपनी मुंहिम में सभी धर्मिक गुरूओं को शामिल होने की अपील की थी मगर वह देखते हैं कि इस में उन्हें निजी कितना लाभ होगा ओर वह मानवता के लाभ को नहीं देख पा रहे। उन्होंने माना कि उनके द्वारा जो पर्यावरण बचाने की मुहिंम चलाई जा रही है उसमें महिलाओं का बराबर का योगदान है।

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