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युवाओं के लिए शॉपिंग के गुर

लापरवाह, फिजूलखर्च, पैसा उड़ाने वाले और न जाने ऐसे ही कई तरह के जुमले युवा पीढ़ी हमेशा सुनती आई है। इसके पीछे कारण है वक्त का तेजी से बदलना। पुराने लोग जिस माहौल में रहते थे उनमें वो सब नहीं था जो युवाओं को उपलब्ध है।

मौजूदा दौर में देखें तो मोबाइल, आईपॉड, जींस, बाइक, कार, प्ले स्टेशन, पब इतनी सारी मनोरंजन की चीजें सामने होने पर युवाओं का उनके प्रति आकर्षित होना स्वाभाविक ही है।  पर उनसे भी पैसे की कद्र करने की दरकार है। पैसे की कीमत समझते हुए जेब ढीली की जाए तो उनके लिए भी शॉपिंग का मज दो-गुना हो जाए। यहां युवाओं के लिए शॉपिंग के कुछ ऐसे ही फार्मूले पेश कर रहे हैं राकेश तनेजा

कपड़ों की खरीदारी करते समय
कपड़ों की खरीदारी करते हुए बड़े मॉल्स का आकर्षण छोड़ देना चाहिए। मोटे-मोटे किराये या लीज रेंटल पर दुकानें लेने वाले डिस्काउंट देने में परहेज करते हैं। बेहतर होगा कि सस्ता लेकिन बढ़िया कपड़े लेने के लिए रिटेल शॉप्स की ओर रुख करें। आजकल वसे भी ब्रांडेड कपड़ों पर भारी भरकम छूट का फैशन चल निकला है।

कई मामलों में तो एक कपड़े की खरीद पर छह कपड़े तक फ्री दिए जते हैं। बेशक इनमें रिटेलर की की मंशा ‘मोर सेल मोर प्रॉफिट’ वाली होती है, लेकिन देखा जए तो घाटे में ग्राहक भी नहीं रहता। कोशिश करें कि शॉपिंग करते समय फैशन की दौड़ से बाहर ही रहें। डिजइनर क्रेज चंद दिनों तक कायम रहता है फिर उसे पीट कर कोई नया फैशन बाजर पर छा जता है।

ऐसे में ज्यादा फैशन के पीछे भागना नाहक ही अपनी जेब पर बोझ डालने जसा होगा। कोई भी कपड़ा लेने से पहले उसकी जरूरत पर विचार करें। कोशिश करें कि कपड़े ऑफ सीजन में खरीदें ताकि उन पर मिलने वाली छूट के फायदे से दो-गुनी शॉपिंग की ज सके। हो सके तो घर पर बैठ कर ऑनलाइन शापिंग का मज लीजिए। ऑनलाइन शा¨पग में कई तरह के आकर्षक ऑफर दिए जते हैं। ऑनलाइन शापिंग सुरक्षित होती है और साथ ही पार्किग खोजने की कोफ्त से भी निजत मिलती है। ऑनलाइन शा¨पग में माल पंसद न आने पर वापसी का विकल्प भी रहता है। साथ ही क्रेडिट कार्ड से भी डिस्काउंट ऑफर मिलते हैं।

गैजेट्स खरीदने के समय
मोबाइल फोन, आईपॉड, प्ले स्टेशन, वीडियो गेम्स के बाजर में एक से बढ़कर एक गैजेट्स आ चुके हैं और कुछ बाजर में जल्द ही दस्तक देने वाले हैं। ऐसे में कुछ भी नया गैजेट खरीदने से पहले मार्केट रिसर्च कर लें कि क्या कुछ बाजर में है और क्या कुछ नया होने वाला है। इस जनकारी को नेट या अपने दोस्तों के नेटवर्क से हासिल किया ज सकता है।

मोबाइल के बाजर में तो तकनीक इतनी तेजी से आगे बढ़ रही है कि सुबह को खरीदे हैंडसेट पर शाम तक ऑउटडेटिड होने का खतरा मंडराने लगता है। ऐसे में नई तकनीकयुक्त मोबाइल लेने से थोड़ा परहेज करना चाहिए क्योंकि पहले पहल पेश की जने वाली तकनीक का पूरा प्रीमियम कंपनी शुरुआती ग्राहकों से ही वसूल करती है। लेकिन नए के क्रेज पर लगाम लगा ली जए तो थोड़े ही दिन में वही हैंडसेट या उसके जसा ही समान तकनीक वाला दूसरी कंपनी का हैंडसेट बाजर में काफी कम कीमत पर मिल जता है।

शेयर करना सीखें
दोस्तों से अपने गैजेट्स शेयर करना सीखें। कोई गीत डाउनलोड करे तो बाकी सब उससे कॉपी कर लें। पढ़ने के लिए नॉवेल, मैग्जीन या किताब खरीदने से पहले दोस्तों से पूछ ले कि उनमें से किसी के पास वह मौजूद है या फिर कोई अन्य दोस्त उस किताब या मैग्जीन को खरीदने ज रहा है तो मिलकर उसे खरीद लें और बारी-बारी से उसे पढ़ें।

मोबाइल में रोज-रोज नए रिंगटोन या गेम्स आते हैं, इसलिए सब कोपैसा खर्च करने की जरूरत नहीं। दोस्तों की मंडली आपस में तय कर सकती है कि कौन-सा गाना कौन व्यक्ित मंगाएगा और बाकी उसे शेयर करेंगे। इस तरह से मनोरंजन पर काफी पैसा फिजूल जने से बचाया ज सकता है या फिर कहें तो उसी रकम में ज्यादा मनोरंजन हासिल किया ज सकता है।

खाने-पीने और पार्टी के समय
युवाओं का प्रमुख शौक होता है खाना-पीना और पार्टी-शार्टी। जहां दो-चार दोस्त मिल जएं तो पाटी देने-दिलाने की बात चल निकलती है। अगर आप भी ऐसे दोस्तों की मंडली में रहते हैं तो फिक्र की बात नहीं। पैसा बचाने के लिए कुछ तरीके हमेशा रहते हैं। सबसे पहले आप कोई ऐसा रेस्तरां खोजिए जिसमें हैप्पी आवर्स का सिस्टम चलता है। जी हां, हैप्पी ऑवर्स का ऑफर सिर्फ शराब-बीयर इत्यादि पर ही नहीं, बाकायदा भोजन पर भी चलता है।

एक दाल के साथ दाल फ्री, दो परांठे पर तीसरा फ्री, कहीं-कहीं तो कोल्ड ड्रिंक की पूरी सप्लाई फ्री का सिस्टम भी चलता है। इस तरीके से पार्टी में पैसा बचाया ज सकता है। कोशिश करें तो किसी क्लब की मेंबरशिप ली ज सकती है या किसी मेंबर से उसका कोड नंबर लेकर पार्टी दी ज सकती है।

गौरतलब है कि क्लब के मेंबरों को विशेष छूट दी जती है। क्रेडिट कार्ड के पेमेंट से भी पैसा बचाया ज सकता है। कई स्पेशल रेस्तरां में क्रेडिट कार्ड से खरीद पर कैश बैक का ऑफर भी मिलता है। इनके अलावा, रिवार्ड प्वाइंट से आप आगे चलकर जरूरत का सामान मुफ्त हासिल कर सकते हैं।

ट्यूशन को फैशन न बनाएं
आज की ज्वलंत समस्या बनती ज रही है ट्यूशन। ज्यादातर युवा सिर्फ भेड़चाल में ट्यूशन सेंटरों में जुटने लगे हैं। अगर आप पढ़ाई में ठीक हैं और खुद अपना रास्ता सलीके से तय करने में सक्षम हैं तो नाहक ही दोस्तों की खातिर ट्यूशन पर पैसा खर्च करने में समझदारी नहीं है। आजकल की ट्यूशन के रेट भी घंटों के हिसाब से तय होने लगे हैं।

कोशिश करें कि ट्यूशन की इन दुकानों से दो हाथ दूर रहें या फिर अपने किसी ऐसे मित्र के साथ मिलकर पढ़ाई करें जो किसी विषय में आपकी मदद करे तो दूसरे विषय में आप उसकी। नेट पर ऑनलाइन ट्यूटोरियल्स की मदद भी ली ज सकती है। ये आमतौर पर निशुल्क होते हैं या फिर यू-ट्यूब या अन्य नेटवर्किग साइट्स पर अपने ऐसे वरिष्ठ मित्र खोजें जो आपको पढ़ाई में मदद कर सकें।

जब बाइक या स्कूटर लेनी हो तो
बाइक का नाम लेते ही हर युवा के चेहरे पर एक रोशनी खिल आती है। युवाओं को अपनी पसंद को कई पैमानों पर तौल कर चलना चाहिए। खुद से सवाल करना चाहिए कि जो बाइक आप खरीदने ज रहे हैं क्या वह आपके या आपके माता-पिता के पैसे की पूरी कीमत लंबे समय में चुका पाएगी। महंगी बाइक लुक्स में तो अच्छी होती है पर एवरेज के मामले में उनसे ज्यादा की उम्मीद करना बेमानी हो जता है। एक विज्ञापन इस मामले में काफी सटीक बैठता जिसमें कहा जता है कि हमेशा करो ज्यादा का इरादा। बाइक का रेट कम हो और एवरेज के साथ सुरक्षा ज्यादा। यही आपकी खरीदारी का मूल मंत्र होना चाहिए।

जब निवेश का वक्त हो तो
जब बात चलती है बचत की तो सबसे पहले जिक्र आता है निवेश का। अपनी बचत को सही तरीके से सही जगह निवेश कर धीरे-धीरे बढ़ाया ज सकता है। अपने प्रोफाइल के हिसाब से आप निवेश कर सकते हैं। अगर आपके पास समझ है तो सीधे इक्िवटी मार्केट में निवेश करें। आप इस कार्य में निवेश सलाहकार की मदद अवश्य लें जो आपको बाजर और उसमें मौजूद कंपनियों की सही-सही जनकारी दे सकता है।

कहीं ऐसा न हो युवा मन पैसे के लालच में किसी फ्रॉड कंपनी के चंगुल में फंस जए। अगर आप बाजर में रोज-ब-रोज होने वाले उतार-चढ़ाव से विचलित होने से घबराते हैं तो आप म्यूचुअल फंड्स की शरण में ज सकते हैं। अगर आपके पास एकमुश्त पैसा नहीं है तो आप सिप की मदद से धीरे-धीरे अपने भविष्य को सुरक्षित कर सकते हैं।

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