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मनी मैनेजमेंट के सात सूत्र

कहते है कि पैसा आसान जीवन जीने का पासपोर्ट होता है। उम्र कोई भी हो, पैसे की जरूरत हमेशा बनी रहती है। जवानी में मौज-मस्ती के लिए तो बुढ़ापे में सम्मान के साथ सिर उठाकर जीने के लिए। जवानी के जोश में पैसा हाथ से फिसलता जता है और बुढ़ापे की लाठी में यानी पेंशन फंड के लिए पैसा जुड़ नहीं पाता। यहां युवाओं के लिए पेश हैं पैसे को कस कर पकड़ने के गुर।

1. जवानी से ही करें निवेश की शुरुआत
वसे तो युवा पीढ़ी के लिए कहा जता है कि वह हवा के घोड़े पर सवार रहती है, उन्हें हर काम में जल्दी करने की आदत रहती है और जल्दी का काम शैतान का होता है वगैरह-वगैरह। लेकिन निवेश और बचत का उसूल है कि जितनी जल्दी शुरुआत की जए, वह उतनी बेहतर होती है। दीर्घकालिक नजरिए से निवेश और बचत का मोर्चा जल्दी बांध लेने से भविष्य के उज्जवल होने की गांरटी बढ़ती जती है। आमतौर पर युवा पीढ़ी भविष्य के बारे में नहीं सोचती या फिर कहें तो यह उम्र ही ऐसी होती है जो बुढ़ापे के बारे में सोचते हुए थोड़ा घबराती है। लेकिन निवेश और बचत के मामले में हर दिन की गिनती होती है। अगर आपने अभी तक  शुरुआत नहीं की है तो फौरन बचत और निवेश की दीर्घकालीन योजना बनाएं और अमल करना शुरू करें।

2. सिर्फ पैसे की बात नहीं है
पैसे कमाना तो हर किसी को आता है, लेकिन पैसा बचाने की कला या फिर कहें पैसे को सही तरीके से बचाकर निवेश करने का विज्ञान हर किसी के समझ की बात नहीं है। कोशिश करें कि आप बचत के तरीकों की जनकारी लें। एक बार बचत की आदत बन जए तो आप उस आदत को जीवन के अन्य पहलुओं में भी शामिल कर सकते हैं। शॉपिंग में बचत कैसे हो, घर का बजट कैसे बने, ट्रैवल बजट कैसा हो, ये सब बातें आपकी जीवनशैली में अगर समा गईं तो आप बचाए गए पैसों से अपने और अपने परिवार के लिए कहीं का टूर प्लान कर सकते हैं या फिर उन्हें कोई उपहार दे सकते हैं। लब्बो-लुआब यह कि बचत और निवेश की जुगलबंदी से जीवनशैली में सुधार किया ज सकता है।

3. पूंजी और आय में फर्क क्या है
पैसे के बारे में कई लोग भ्रम के शिकार रहते हैं, उन्हें अपनी कमाई और पूंजी में अंतर करना नहीं आता। पूंजी का मतलब कुछ भी हो सकता है - मकान, दुकान, शेयर या कोई अन्य निवेश जो आय जेनरेट करता हो। इसे इस तरह से समझ ज सकता है कि पूंजी एक पेड़ है और उसका फल उससे हासिल होने वाली आय है। जब तक आपका पेड़ सलामत है, आपको आय मिलती रहेगी। इसलिए अपनी पूंजी को बढ़ाते जना और उसकी रक्षा करने से आय में वृद्धि हो सकती है।

4. जब शक हो तो इरादा बदल दें
पैसे के मामले में किसी निवेश या बचत स्कीम को लेकर आप संशकित हों तो अपने इरादे को फौरन त्याग दें। पैसे को लेकर जुआ खेलना कायदे और फायदे की बात नहीं होती। कई लोग शेयर बाजर में हुए घाटे को लेकर कहते हैं कि कोई बात नहीं यहीं कमाया था, यहीं डूबा। लेकिन कमाया तो मेहनत से था उसे लापरवाही से लुटाने से बचना चाहिए।

5. क्रेडिट कार्ड का शौक न पालें
नाहक ही 40-50 फीसदी सालाना का ब्याज देने से बेहतर है और अपने क्रेडिट कार्ड के इस्तेमाल की लत पर लगाम लगाएं। जरूरत हो तो कम ब्याज वाले विकल्पों का प्रयोग कर पैसा जुटाया ज सकता है। सिर्फ रिवार्ड प्वाइंट और फ्री गिफ्ट के चक्कर में अपनी गाढ़ी कमाई को व्यर्थ न जने दें।

6. उधार यानी भविष्य की कमाई में सेंध
पैसा उधार लेने का मतलब होता है कि आप अपने भविष्य में होने वाली कमाई का कुछ हिस्सा मय ब्याज देनदार को देने का जुगाड़ कर रहे हैं। कई बार यह ब्याज मूलधन से कई गुना ज्यादा बैठता है। तो कोशिश करें कि किसी मित्र या रिश्तेदार से मदद मांगी जए। जरूरत पड़ने पर ही लोन लिया जए और क्रेडिट कार्ड से लोन लेने से तौबा की जए।

7. चंगुल में न पड़ें
देनदार आपको पैसा इसलिए नहीं देता कि आप उसका मूलधन चुका दें, बल्कि उसका लक्ष्य होता है कि आप कम से कम पैसा चुकाएं और ब्याज के भंवर में फंसे रहें। क्रेडिट कार्ड कंपनियां भी इसी लिए न्यूनतम मासिक भुगतान का विकल्प देती हैं ताकि आप उनके चंगुल से निकल न पाएं।

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