class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

मृत पशुओं की पहचान में वरदान है

अवशेषों के  माध्यम से मृत पशुओं की पहचान की नयी तकनीक देश में तीन सौ से अधिक गुत्थियां सुलझने के  साथ ही बहुत सकारात्मक नतीजे दे रही है। हैदराबाद स्थित सेंटर फार सेल्युलर एंड मालीक्यूलर बायोलाजी (सीसीएमबी) ने इसका विकास किया है और इस विधि में त्वरित डीएनए विश्लेषण होता है। सीसीएमबी के  एक वरिष्ठ वैज्ञानिक ने बताया कि पीसीआर (पालीमरेज चेन रिएक्शन) नामक तकनीक ने 300 मृत पशुओं की गुत्थी सुलझाई है।


डा. एस. शिवाजी सिंह ने बताया, पका हुआ मांस, बाल, त्वचा या अस्थि के  अंश, नाखून और रक्त जिसमें डीएनए हो यह मृत पशु की पहचान में मदद करता है। केवल एक प्राइमर पालमरेज चेन रिएक्शन पशु के  बारे में जानकारी देने के  लिए काफी है। इससे पहले वन्य जीवों से जुड़ी संस्थाओं के  लिए मृत जीवों की पहचान करने का केवल एक ही विकल्प था उपलब्ध नमूनों से डीएनए फिंगर प्रिंटिंग तकनीक, जिसमें काफी समय लगता है और उसे पूरा करने में काफी विशेषज्ञता की जरूरत होती है।

डा. एस. शिवाजी सिंह ने बताया कि इस परीक्षण को एक सरल मालीक्यूलर जीवविज्ञान प्रयोगशाला में पूरा किया जा सकता है और इसमें किसी विशेषज्ञ की जरूरत नहीं पड़ती। डीएनए फिंगर प्रिंटिंग तकनीक में मानक नमूने से तुलना करनी पड़ती है, लेकिन इसे केवल  एक प्रक्रिया में पूरा कर सटीक परिणाम नतीजे पाये जा सकते हैं। पहले ही इस तकनीक का पेटेंट हो चुका है। इसका विकास सीसीएमबी के  निदेशक डा. लालजी सिंह और उनके  विद्यार्थियों ने किया है।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:मृत पशुओं की पहचान में वरदान है