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19वीं बार स्कूटर से लेह की यात्रा कर लौटे भटनागर

कहते हैं हौसले बुलंद हों तो उम्र कोई मायने नहीं रखती। 74 वर्ष के जेपी भटनागर को देखकर यही लगता है। उम्र के इस पड़ाव में भी वह स्कूटर चलाकर गाजियाबाद से लेह तक का सफर तय कर सकुशल अपने घर लौट आए। रास्ते में उन्हें मुश्किलों का भी सामना करना पड़ा। बर्फीली पहाड़ियों का सफर काफी कठिन था। इस सफर में अगर कोई काम आया तो वह भारतीय सेना के जाबांज जवान। स्कूटर स्लिप होने से वह कई बार गिरे। हर बार सेना के जवानों ने उन्हे उठाया। चोट भी लगी फिर भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। और आगे की यात्रा पर निकल गए। इससे पहले भी वह 18 बार कई जगहों की यात्रा कर चुके हैं। इसके लिए तीन बार उनका नाम लिम्का बुक आफ रिकार्ड में भी दर्ज हो चुका है।

साहिबाबाद के नवीन पार्क में रहने वाले जेपी भटनागर ने अपनी यह यात्रा 13 मई को अपने घर से शुरू की। जालंधर, ऊधमपुर, अवन्तिपुर से होते हुए वह सोनमल पहुंचे और वहां तीन दिन आराम किया। इसके बाद उन्होंने लद्दाख और श्रीनगर के बीच पड़ने वाला खतरनाक जोजीला दर्रा पार कर कारगिल पहुंचे जहां दो दिन रुकने के बाद खलसे होते हुए लेह तक का सफर तय किया। बर्फीली वादियों और हड्डियों को जमा देने वाले सर्द हवाएं भी उनके उत्साह को नहीं डिगा पायीं। यात्रा के दौरान वह खतरनाक बर्फीली पहाड़ियों पर कई बार स्कूटर स्लिप होने से गिरे भी फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी। यात्रा कर लौटे जेपी बताते हैं कि पहले जहां लेह-लद्दाख जाने में लोग घबराते थे वह अब टूरिज्म का केंद्र बनता जा रहा है। ऑक्सीजन की कमी को रोकने के लिए वहां के लोग पेड़-पौधे लगाने पर ज्यादा जोर दे रहे है। उन्होंने बताया कि हिंदी भाषा के मामले में लद्दाख में रहने वाले लोग थोड़ा कमजोर हैं। वहां हिन्दी को बढ़ावा मिले इसके लिए वह भारत सरकार के हिंदी निदेशालय से इसकी मांग करेंगे।

कभी टीचर रह चुके भटनागर अपने स्कूटर से गंगोत्री, बद्रीनाथ, रोहतांग, मुंबई और पुणे की यात्राएं कर चुके हैं। अपनी दुर्गम यात्राओं के बारे में बताते हैं कि कई बार उन्हे बेहद गंभीर हालातों से भी जूझना पड़ा। पहाड़ी क्षेत्र में रहने वाले खूंखार जानवर भी उनके सामने आए लेकिन सभी उनसे ऐसे शर्मा कर निकल गए जैसे उनके हौसलों और हिम्मत की दाद दे रहें हों।

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  • Web Title:19वीं बार स्कूटर से लेह की यात्रा कर लौटे भटनागर